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डीपफेक के जोखिमों से लेकर बच्चों की ऑनलाइन प्राइवेसी तक सरकार सख्त, डिजिटल सुरक्षा का नया ढांचा किया तैयार

एआई के बढ़ते खतरे के बीच सरकार ने डिजिटल सुरक्षा का नया ढांचा तैयार किया है। आइए इसके नए नियमों पर नज़र डालते हैं।
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भारत

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Tanay Mishra

Aug 07, 2026

Ministry of Electronics & IT

इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (File Photo)

एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI - Artificial Intelligence) के बढ़ते इस्तेमाल के साथ इसके दुरुपयोग की आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने डिजिटल सुरक्षा का ढांचा मजबूत किया है। डीपफेक, एआई से तैयार भ्रामक सामग्री और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से निपटने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी नियमों में बदलाव किए गए हैं। नए प्रावधानों के तहत सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को एआई जनरेटेड सामग्री की पहचान, स्पष्ट लेबल और पहचान योग्य मेटाडेटा उपलब्ध कराना होगा। इसका उद्देश्य डीपफेक, पहचान की नकल और गलत सूचना के प्रसार पर रोक लगाना है।

3 घंटे में हटानी होगी अवैध सामग्री

डिजिटल सुरक्षा के नए ढांचे की जानकारी केंद्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) और राज्य मंत्री जितिन प्रसाद (Jitin Prasada) ने लोकसभा में सवालों के लिखित जवाब में दी। नए नियमों के अनुसार अदालत या सक्षम सरकारी एजेंसी से सूचना मिलने पर गैरकानूनी सामग्री हटाने की समय सीमा 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे कर दी गई है। इसमें डीपफेक, बिना सहमति की अंतरंग तस्वीरें और बाल यौन शोषण सामग्री शामिल हैं। 50 लाख से ज़्यादा यूज़र्स वाले बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को तकनीकी उपायों से ऐसी सामग्री की पहचान करनी होगी। डीपफेक से निपटने के लिए आईआईटी जोधपुर और मद्रास पहचान प्रणाली, जबकि आईआईटी खड़गपुर रियल टाइम वॉइस डीपफेक डिटेक्शन तकनीक विकसित कर रहा है।

बच्चों की डिजिटल प्राइवेसी पर विशेष फोकस

डीपीडीपी एक्ट, 2023 के तहत बच्चों के व्यक्तिगत डेटा के इस्तेमाल के लिए अभिभावकों की सहमति ज़रूरी है। बच्चों की गतिविधियों की ट्रैकिंग, व्यवहार की निगरानी और लक्षित विज्ञापन पर भी रोक है। इंडिया एआई मिशन के तहत सुरक्षित एआई के विकास पर जोर दिया जा रहा है। जागरूकता अभियान के तहत देशभर में 6,650 से ज़्यादा वर्कशॉप्स हो चुकी हैं, जिनमें 11.37 लाख से ज़्यादा लोग शामिल हुए। डिजिटल सुरक्षा के नए ढांचे के तहत सभी नए नियमों की विस्तृत जानकारी इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय की तरफ से दी गई। एआई काफी फायदेमंद है और लगभग हर सेक्टर में इसका इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन कई लोग इस तकनीक का गलत और अनुचित इस्तेमाल भी करते हैं जिसका बच्चों पर गलत असर पड़ता है। इसी वजह से सरकार ने यह फैसला लिया है।

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