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गुजरात : अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट के दोषियों ने खटखटाया HC का दरवाजा, मौत की सजा के फैसले को दी चुनौती

बम धमाकों के मामले में 30 दोषियों ने हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में दोषसिद्धि और मौत की सजा के आदेश पर रोक लगाने की अपील की। न्यायमूर्ति वी एम पंचोली और न्यायमूर्ति ए पी ठाकर की पीठ ने इस अपील को स्वीकार कर लिया है।

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Gujarat High Court

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2008 के अहमदाबाद सिलसिलेवार बम विस्फोटों के लिए मौत की सजा के खिलाफ 38 दोषियों में से 30 अपनी सजा के खिलाफ गुजरात हाईकोर्ट पहुंचे है। गुजरात उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने उनकी अपील को स्वीकार कर लिया। अदालत उनकी मौत की सजा की पुष्टि के आवेदन के साथ उनकी अपील पर सुनवाई करेगी। दोषियों ने याचिका में तर्क देते हुए कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर निर्भर मामले में मौत की सजा नहीं दी जा सकती है।


न्यायमूर्ति विपुल पंचोली और न्यायमूर्ति एपी ठाकर की खंडपीठ ने शुक्रवार को 30 दोषियों के एक आवेदन को स्वीकार कर लिया, जिसमें अदालत से अपील दायर करने में 115 दिन की देरी को नजरअंदाज करने को कहा गया था। बता दें कि दोष सिद्ध होने के बाद 90 दिनों के निर्धारित समय के भीतर अपील दायर करनी होती है।


2008 के सीरियल ब्लास्ट मामले में दोषियों ने वकील एमएम शेख और खालिद शेख के माध्यम से याचिका दायर की गई है। इसमें हाईकोर्ट से दोषसिद्धि और मौत की सजा के आदेश पर रोक लगाने की अपील की है। हालांकि हाईकोर्ट ने इनके अनुरोध को खारिज करते हुए एक अलग आवेदन दायर करने को कहा है।


आपको बता दें कि 18 फरवरी को अहमदाबाद की एक विशेष अदालत ने कुल 49 आरोपियों में से 38 को आईपीसी के तहत हत्या के अपराधों, यूएपीए के प्रावधानों, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और अन्य प्रावधानों के तहत दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी। वहीं, 11 अन्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी


गौरतलब है कि अहमदाबाद और सूरत में 26 जुलाई 2008 को हुए सीरियल बम धमाकों से यह मामला जुड़ा है। इन ब्लास्ट में 56 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, 200 से ज्यादा घायल हुए थे।