
hc says consuming liquor in private place without nuisance not offence
नई दिल्ली। केरल हाईकोर्ट ने निजी स्थान पर शराब के सेवन से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह अपराध नहीं है। कोई भी शख्स निजी स्थान पर शराब का सेवन कर सकता है और इसे अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, जब तक वहां कोई उपद्रव न हुआ हो। केवल शराब की गंध से यह साबित नहीं किया जा सकता कि वह शख्स नशे में था।
निजी स्थान पर शराब पीना अपराध नहीं
दरअसल, केरल हाई कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर सरकारी कर्मचारी के खिलाफ 2013 में पुलिस की ओर से दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की गई थी। जस्टिस सोफी थॉमस ने 38 साल के सलीम कुमार के खिलाफ प्राथमिकी रद्द करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि केवल शराब की गंध का मतलब यह नहीं लगाया जा सकता है कि वह व्यक्ति नशे में था या किसी प्रकार के शराब के प्रभाव में था। इसे अपराध की श्रेणी में तभी रखा जाएगा, जब शख्स वहां पर कोई उपद्रव करे।
पुलिस ने आरोपी की पहचान करने बुलाया था
बता दें कि केरल पुलिस ने एक सरकारी कर्मचारी के खिलाफ अधिनियम की धारा 118 (ए) के तहत मामला दर्ज किया था, जिसमें कहा गया था कि जब उन्हें एक आरोपी की पहचान करने के लिए स्टेशन बुलाया गया था, तो वह शराब के नशे में था। इसके बाद सलीम ने इस मामले पर हाई कोर्ट का रुख किया था।
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उन्होंने कोर्ट को बताया कि उन्हें एक आरोपी की पहचान करने के लिए शाम सात बजे पुलिस स्टेशन बुलाया गया था, जिसके खिलाफ आईपीसी की धारा 353 और केरल नदी तट संरक्षणम की धारा 20 के तहत मामला दर्ज किया गया था। कुमार ने कोर्ट को बताया कि आरोपी एक अजनबी था, इसलिए वह उसकी पहचान नहीं कर सका। जिसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ केस दर्ज कर लिया।
Published on:
16 Nov 2021 06:08 pm
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