
ईरान का दुबई पर हमला (फोटो - Rashid एक्स पोस्ट)
Iran attacking Dubai: मिडिल ईस्ट में लंबे समय से जारी भू-राजनीतिक तनाव अब एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच टकराव का असर अब सीधे गल्फ देशों पर दिखने लगा है। इसी कड़ी में ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ गई है। यूएई रक्षा मंत्रालय के अनुसार 28 फरवरी से अब तक ईरान ने 304 बैलिस्टिक मिसाइल, 15 क्रूज मिसाइल और 1627 कामिकाजे ड्रोन दागे हैं, हालांकि अधिकांश को एयर डिफेंस सिस्टम ने निष्क्रिय कर दिया।
इसी कड़ी में मंगलवार सुबह अबू धाबी के एक ऑयल फील्ड पर मिसाइल गिरने से कुछ समय के लिए हवाई क्षेत्र बंद करना पड़ा। ईरान ने दुबई, अबू धाबी और शारजाह जैसे आर्थिक केंद्रों को प्राथमिक लक्ष्य बनाया है। ये शहर मिडिल ईस्ट के फाइनेंशियल हब माने जाते हैं, इसलिए इन पर हमला वैश्विक ध्यान आकर्षित करता है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का कहना है कि यूएई अमेरिका का समर्थन करता है और अब्राहम अकॉर्ड्स का हिस्सा है, इसलिए उसे निशाना बनाया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति केवल सैन्य नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक भी है। अरब देशों में पहले से मौजूद अमेरिका और इजरायल विरोधी भावना को भड़काने के लिए ईरान इस तरह के हमलों का उपयोग कर रहा है। इससे क्षेत्रीय राजनीति में ध्रुवीकरण और गहराने की आशंका है। यूएई के पास मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम है, लेकिन ईरान के अंदर मौजूद मिसाइल लॉन्च साइट्स को नष्ट करने की क्षमता सीमित है। ईरान के पहाड़ी इलाकों जैसे जगरोस और अलबोर्ज में स्थित ठिकानों तक पहुंचना आसान नहीं है। ऐसे में यूएई और अन्य गल्फ देश अमेरिका की सैन्य मदद पर निर्भर हैं।
एक अन्य दृष्टिकोण यह भी है कि गल्फ देशों ने जवाबी कार्रवाई की जिम्मेदारी अमेरिका पर छोड़ दी है। इससे यह संकेत जाता है कि क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन अभी भी अमेरिकी सैन्य ताकत पर टिका हुआ है। हालांकि ईरान लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि अमेरिका अब मिडिल ईस्ट की सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकता। संघर्ष के 18वें दिन तक हमलों की तीव्रता में कुछ कमी आई है, लेकिन मार्च के अंत तक यह जारी रहने की संभावना जताई जा रही है। ईरान का लक्ष्य गल्फ देशों पर दबाव बनाना है ताकि वे अपने यहां से अमेरिकी सैन्य ठिकाने हटाएं। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य के लगभग बंद होने से वैश्विक तेल सप्लाई भी प्रभावित हो रही है।
Published on:
17 Mar 2026 10:25 am
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