
राजधानी दिल्ली में विधानसभा चुनाव प्रचार परवान पर है। राजनीतिक दलों के देशभर के नेता दिल्ली में जमा हैं। लेकिन मुख्यमंत्री आतिशी, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के अलावा पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की विधानसभा सीट की चर्चा ज्यादा है। आम आदमी पार्टी में नंबर-दो की भूमिका में फिट हो चुके सिसोदिया दिल्ली विधानसभा में फिर से एंट्री करने के लिए कड़े मुकाबले में फंसे हैं। वे पटपडग़ंज सीट छोडक़र जंगपुरा विधानसभा से चुनावी जंग में उतरे हैं। पिछली बार सिसोदिया पटपडग़ंज सीट से चुनाव हारते-हारते बचे थे। लेकिन सिसोदिया के लिए जंगपुरा की जंग भी आसान नहीं लग रही। वे भाजपा के तरविंदर सिंह से सीधे मुकाबले में फंसे हैं। कांग्रेस ने यहां से फरहाद सूरी को मैदान में उतारा है और सूरी चुनाव को त्रिकोणीय बनाने में जुटे हैं। अन्य दलों के उम्मीदवार भी मैदान में हैं।
दिल्ली की करीब डेढ़ लाख वोटों वाली जंगपुरा विधानसभा में सिख और पंजाबी मतदाताओं को निर्णायक भूमिका में माना जाता है। यही वजह थी कि आम आदमी पार्टी ने 2013 के अपने पहले चुनाव में यहां से मनिंदर सिंह धीर को उम्मीदवार बनाया था। धीर को करीब 37 फीसदी वोट मिले। बाद में 2015 और 2020 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने प्रवीण कुमार को टिकट दिया और वे चुनाव जीते। 2020 के चुनाव में आप को यहां करीब 50 फीसदी वोट मिले। तीन बार से लगातार यहां आम आदमी पार्टी इस सीट पर कब्जा जमाए हुए हैं। इस बार पार्टी ने उम्मीदवार बदलते हुए मनीष सिसोदिया को मैदान में उतारा है। वहीं जमीन पर माहौल में इस बार पहले से अंतर हैं। भाजपा ने सिसोदिया को घेरने के लिए तरविंदर सिंह को प्रत्याशी बनाया है। वे तीन बार पहले कांग्रेस से विधायक रह चुके हैं। उनका पंजाबी होना भाजपा के लिए मजबूत पक्ष भी माना जा रहा है। यही वजह है कि दोनों के बीच मुकाबला कड़ा और काफी रोचक बना हुआ हैं।
आम आदमी पार्टी का सबसे मजबूत वोट झुग्गी बस्तियों का रहा है। पार्टी को दलित और मुस्लिम वोट भी पिछले चुनावों से लगातार अच्छी संख्या में मिल रहा है। यह वोट कांग्रेस पार्टी का ट्रांसफर होकर आया है। जंगपुरा विधानसभा क्षेत्र में निज़ामुद्दीन बस्ती, दरियागंज, नेहरू नगर, सनलाइट कॉलोनी सहित अन्य क्षेत्र में मुस्लिम और दलित मतदाता अच्छी संख्या में हैं। लेकिन इस बार कांग्रेस ने यहां से फरहाद सूरी को खड़ाकर मनीष सिसोदिया के लिए संकट खड़ा कर दिया है। फरहाद सूरी पूर्व कांग्रेस नेत्री ताजदार बाबर के बेटे हैं। वे 4 बार पार्षद और दिल्ली नगर निगम के मेयर रहे हैं।
वोटिंग - 60.66 फीसदी
जीते - प्रवीण कुमार (आप)
हारे - इम्प्रीत सिंह (भाजपा)
आप को वोट शेयर - 50.88 प्रतिशत
भाजपा को वोट शेयर - 32.77 प्रतिशत
जीत का अंतर रहा - 16063
Published on:
30 Jan 2025 08:24 am
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