3 मार्च 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

होली के रंग में सियासी दंगल, तारिक से ‘शाह’ तक सब पर उड़ा गुलाल

होली के रंग में सियासी मुकाबले, तारिक की जीत, ‘शाह’ का पलटवार, पाकिस्तान की मायूसी और फिल्मी अंदाज़ में हुनर का जलवा—राजनीति, व्यंग्य और रंगों का तड़का।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Ashib Khan

Mar 03, 2026

तारिक ने तगड़ा लड़ा, मार लियो मैदान।
बंगभूमि ने फिर सुना, लोकतंत्र गुणगान।
लोकतंत्र गुणगान, थमै अब दंगाबाजी।
रहै पड़ोसी शांत, करै ना अंगुलीबाजी।।
बेगमनामा खत्म, हसीना जिया न मालिक।
बेरंग बांग्लादेश, रंगेंगे कैसे तारिक।।

नखरे लाखों थे बड़े, बढ़ी हुई थी मूंछ।
लहजा टेढ़ा ही रहा, ज्यों श्वानों की पूंछ।।
ज्यों श्वानों की पूंछ, 'शाह' ने सीधी कर दी।
पाकिस्तान निराश, चाल जो उलटी चल दी।।
इज्जत बची न मैच, फिरत मारे अध-कचरे।

मौका कियो न कैच, करे बेमतलब नखरे।

पिक्चर परदे पर चली, गरदा दियो उड़ाय।

लो विनोद के पूत ने, दीन्हों हुनर दिखाय।।

दीन्हों हुनर दिखाय, धुरन्धर अभिनय करके।

दूजे एक्टर दबे, बसे दिल खन्ना सबके।

चली पाक तक बात, गपोड़ी मारैं सि€सर।

बन डकैत रहमान, बदल दी सारी पिक्चर।।

इन्दौरी कैलाश अब, बतलावत औकात।
कल तक थी जो सड़क पर, पहुंची सदन वो बात।।
पहुंची सदन वो बात, कलर सत्ता का चोखा।
जनता पीवै जहर, पेयजल तक में धोखा।।
मोहन माफी मांग, काम निपटायो फौरी।
अपना या कि पराय, सहज लहजा इन्दौरी।।

जमकर पैसा नाम ले, कहत मिलत नहीं काम।
अरे यार रहमान जी, आप कहां बे-काम।।
आप कहां बे-काम, लाज राखो तो कद की।
जय जय सब दिश होय, धुनें ना इक सरहद की।।
अखतर कंगना करैं, बयां से निन्दा मनभर।
नहीं यहां पर भेद, काम है कर लो जमकर।।

तेजी से रंग बदलते इस दौर में कहीं डॉनल्ड ट्रंप का ‘आइलैंड राग’ और टैरिफ की ठसक, तो कहीं नरेन्द्र मोदी-राहुल गांधी की रंगभरी ‘अनकॉ्प्रोमाइज्ड’ ट€क्कर... खेल का मैदान हो या कारोबार का चौक, हर गहमागहमी पर फागुनी छाप... चित्र-शिल्पी शिरीष श्रीवास्तव की कूंची और फागुनी कलमकार राम नरेश गौतम की रंगरेज लेखनी ने होली के रंगों में मुस्कान की ऐसी मिठास घोली है जो आपको भिगोएगी भी और गुदगुदाएगी भी...