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‘हम अदाणी के हैं कौन’ के तहत कांग्रेस ने लगातार दूसरे दिन PM मोदी से पूछे 3 नए सवाल

कांग्रेस लगातार अदाणी के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र सरकार पर निशाना साध रही है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आज लगातार दूसरे दिन 'हम अदाणी के हैं कौन' के तहत PM मोदी से 3 नए सवाल पूछे हैं।

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‘Hum Adani Ke Hain Kaun’: Congress fresh questionnaire to Modi govt

अदानी ग्रुप पर लगे फाइनेंशियल फ्रॉड के आरोपों की जांच की मांग के साथ कांग्रेस संसद से सड़क तक विरोध-प्रदर्शन कर रही है। आज कांग्रेस सहित कई विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने संसद परिसर में गांधी की प्रतिमा के पास विरोध-प्रदर्शन किया। इसके साथ ही कांग्रेस ने देश के विभिन्न राज्यों में विरोध प्रर्दशन किया। वहीं राहुल गांधी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि "मैं सरकार के बारे में काफी समय से बोल रहा हूं कि 'हम दो, हमारे दो'। सरकार डरी हुई है कि संसद में अदाणी जी पर चर्चा न हो जाए। सरकार को इस पर चर्चा करानी चाहिए। आप लोग कारण जानते ही हैं कि इस पर चर्चा क्यों न हो। मैं 2-3 साल से यह मुद्दा उठा रहा हूं। हम चाहते हैं कि इस पर चर्चा हो और सब साफ हो। लाखों करोड़ रुपए का भ्रष्टाचार हुआ है। हिंदुस्तान के इन्फ्रास्ट्रक्चर पर जो कब्ज़ा किया गया है उसकी जांच हो और अडाणी जी के पीछे कौन सी शक्ति है वह भी देश को पता चले।"

इसके अलावा बीते दिन रविवार को कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री मोदी से ही तीन सवाल किए थे। इसके साथ ही कहा था कि आज से इस मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी PM से प्रतिदिन तीन प्रश्‍न पूछेगी। जिसके तहत जयराम रमेश ने आज फिर से बयान जारी करते हुए PM मोदी से सवाल किए हैं।

पहला सवाल: पूंजीपति मित्रों को लाभ पहुंचाने के लिए ये आपके मन की बैंकिंग का उदाहरण?
LIC के निवेश के मुद्दे पर निशाना साधते हुए जयराम रमेश ने PM मोदी से सवाल किया कि "IDBI बैंक, न्यू इंडिया एश्योरेंस और जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन जैसे असफल विनिवेशों से उबारने के लिए LIC निधियों का यूज करने के संबंध में आपकी सरकार का लंबा ट्रैक रिकॉर्ड रहा है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को ऐसी परिस्थितियों से उबारना एक बात है, लेकिन अपने पूंजीपति दोस्तों को और अमीर बनाने के लिए 30 करोड़ बफादार पॉलिसी धारकों की बचत का यूज करना दूसरी बात है। LIC ने जोखिम भरे अदाणी ग्रुप में इतना बड़ा निवेश कैसे किया, जबकि निजी फंड प्रबंधकों ने भी इससे किनारा कर लिया था? क्या यह सुनिश्चित करना सरकार का कर्तव्य नहीं है कि सार्वजनिक क्षेत्र के महत्वपूर्ण वित्तीय संस्थान निवेश करते समय अपने निजी क्षेत्र के समकक्षों की तुलना में अधिक सजग रहे? या फिर यह आपके पूंजीपति मित्रों को लाभ पहुंचाने के लिए आपके 'मन की बैंकिंग' का एक और उदाहरण था?"

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दूसरा सवाल:अदानी ग्रुप में निवेश का वास्तविक लाभार्थी कौन?
दूसरे सवाल में जयराम ने कहा कि "अदानी ग्रुप के खिलाफ धोखाधड़ी और धन-शोधन के आरोप कुछ समय से सार्वजनिक पटल पर हैं। अदानी ग्रुप में प्रमुख फड़ों के निवेश के वास्तविक लाभार्थी कौन है। इस संबंध में अनेक सवाल उठते रहे हैं। विदेशी निवेशकों के वास्तविक स्वामित्व संबंधी धोखाधड़ी के मामलों में, सेबी द्वारा एक मामले की जांच सहित कुल 4 मामलों में जांच की गई है। इस जानकारी को समक्ष रखते हुए, क्या प्रधानमंत्री कार्यालय वित्त मंत्रालय या स्वंय LIC में से किसी ने इन संदिग्ध निवेशों के बारे में कोई चिंता व्यक्त की थी? क्या ऐसी चिंताओं को खारिज कर दिया गया था और यदि हां, तो किसके द्वारा?"

तीसरा सवाल: क्या LIC को हुए नुकसान को सार्वजनिक करेगी सरकार?
रिटेल निवेशकों के विश्वास और LIC में गिरावट को लेकर आज कांग्रेस का तीसरा सवाल रहा। जमराम रमेश ने कहा कि "हिंडनबर्ग के आरोपों के बाद पहली बिकवाली में LIC द्वारा खरीदे गए अदानी ग्रुप के शेयरों का मूल्य ₹32,000 करोड़ गिर गया, जिससे LIC की स्वयं की स्वीकारोक्ति के अनुसार 27 जनवरी 2023 को उसके शेयरों का मूल्य ₹56,142 करोड़ रह गया। तब से अदानी कास्ट्रक्चर के कई शेयरों में 50% की और गिरावट आई है। क्या आप 24 जनवरी के बाद LIC के द्वारा अदानी ग्रुप में किए गए निवेश से हुए नुकसान की सही जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा करेंगे? निफ्टी 50 सूचकांक में 2% की गिरावट की तुलना में LIC का सूचीबद्ध मूल्य पिछले दो हफ्तों में 14% गिर गया है। चूंकि LIC द्वारा अदानी ग्रुप में दिशाहीन निवेश से इसके 34 लाख रिटेल निवेशकों का इसमें विश्वास कम हो रहा है। ऐसे में आप उनकी चिंताओं को कम करने के लिए क्या कदम उठाएंगे?"

अदाणी के मुद्दे पर सरकार बनाम विपक्ष हुआ मामला
हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद Adani Group को लेकर पूरा शुरू हुआ विवाद सरकार बनाम विपक्ष हो गया है, जिसमें लगातार विपक्ष सरकार और PM मोदी की चुप्पी पर निशाना साध रही है। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को खारिज करते हुए Adani Group की ओर से तो बयान सामने आया है, लेकिन विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे भ्रष्टाचार के आरोप को लेकर कोई भी बयान सामने नहीं आया है। जिसके कारण अब इस मुद्दा सरकार बनाम विपक्ष हो चुका है।

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