
कर्नाटक के चिकमगलूरु जिले के पर्यटन स्थल इन दिनों वीरान हैं। एक तरफ जहां चिलचिलाती धूप ने कॉफी बागानों की हरियाली को निगल लिया है वहीं दूसरी तरफ पिछले दिनों जंगल में लगी आग के बाद मुल्लायनगिरी और बाबाबुदनगिरी इलाके के एक हिस्से की हरियाली नष्ट हो चुकी है। जंगल की आग से प्रभावित कुछ पहाड़ियों पर वन विभाग ने पर्यटकों की आवाजाही रोक दी है। ऐसे में कई पर्यटकों को लौटना पड़ रहा है।
पर्यटकों की कमी के चलते अधिकांश रिसॉर्ट, होमस्टे और होटल खाली पड़े हैं। पूर्ण रूप से पर्यटकों पर निर्भर टैक्सी और जीप चालक बेरोजगार हो गए हैं। चिकमगलूरु जिले के कलसा तहसील के अधिकांश पर्यटन स्थल वीरान नजर आ रहे हैं। कई जगह कर्मचारियों के वेतन में कटौती कर दी गई है। ऐसे में बारिश के लिए प्रार्थना की जा रही है।
अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए मशहूर चिकमगलूरु में वैसे तो सालभर पर्यटकों की आवाजाही रहती है पर जंगल में लगी आग के कारण प्रमुख पर्यटन स्थलों के घास के मैदान जल चुके हैं। ऐसे में गर्मी से बचने के लिए पर्यटक मलनाड का रुख कर रहे हैं। जंगल की आग की आशंका के चलते ट्रैकिंग के लिए मशहूर गलीगुड्डा, रानी झारी, बल्लारायण दुर्गा, कुद्रेमुख और नेत्रवती पर्वतमाला की ओर जाने से पर्यटकों को रोका जा रहा है जिससे स्थानीय कारोबार पर गहरा असर पड़ा है। सप्ताहांत में मुल्लायनगिरी, होन्नम्मानहल्ला, झारी फॉल्स, माणिक्यधारा झरने और बाबाबुदनगिरी इलाकों में जरूर कुछ पर्यटक दिखे, पर पहले वाली रौनक गायब थी।
भारत में कॉफी का सबसे बड़ा उत्पादक कर्नाटक है। देश के कुल कॉफी उत्पादन में इसका 70 फीसदी योगदान है। इसके बाद केरल और तमिलनाडु का स्थान आता है। यहां मुख्य रूप से अरेबिका और रोबस्टा किस्में उगाई जाती हैं। अनुकूल जलवायु के चलते राज्य में कॉफी की खेती चिकमगलूरु, कोडागू और हासन जिलों के पहाड़ी इलाकों में होती है।
Published on:
16 Mar 2025 08:19 am
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