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सुप्रीम कोर्ट ने धर्मांतरण मामले में मौलवी को दी जमानत, हाईकोर्ट को लगाई फटकार, जानिए पूरा मामला

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने मानसिक तौर पर विकलांग युवक को जबरन धर्मांतरित करने के मामले में एक मौलवी को जमानत देते दी है।

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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने मानसिक तौर पर विकलांग युवक को जबरन धर्मांतरित करने के मामले में एक मौलवी को जमानत देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को अवैध रूप से धर्म में परिवर्तित करना हत्या, डकैती या बलात्कार जैसा गंभीर अपराध नहीं है, जिसमें जमानत नहीं दी जाए। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने जमानत नहीं देने के लिए ट्रायल कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट की विवेक का इस्तेमाल नहीं करने के लिए खिंचाई भी की। बेंच ने कहा कि ट्रायल जज अक्सर सम्मेलनों और सेमिनारों में शामिल होने के बावजूद जमानत देने के बजाय आवेदन खारिज करने के लिए विवेक का इस्तेमाल करते हैं।

अर्जी खारिज करने पर हाईकोर्ट की खिंचाई

हाईकोर्ट के पास भी जमानत देने से इनकार करने का कोई उचित कारण नहीं था। हाईकोर्ट से यह अपेक्षा की जाती है कि वह जमानत के मामलों में साहस जुटाए और अपने विवेक का विवेकपूर्ण तरीके से इस्तेमाल करे।कोर्ट ने कहा कि ऐसे हालात के कारण ही दुर्भाग्य से हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जमानत आवेदनों की बाढ़ आ गई है।

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महिलाओं की ऑनलाइन शिकायत प्रणाली क्यों नहीं?

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने में सक्षम बनाने के लिए कोई तंत्र क्यों नहीं है? कोर्ट ने कहा कि इससे थाने के अधिकार क्षेत्र संबंधी समस्या का समाधान होगा और महिलाओं को थाने जाने की जरूरत भी नहीं होगी। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन.कोटिश्वर सिंह की बेंच ने महिला सुरक्षा के बारे में राष्ट्रीय स्तर पर दिशा निर्देश की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।

6 सप्ताह में दाखिल करे हलफनामा

बेंच ने केंद्र को 6 सप्ताह का समय देते हुए सभी संबंधित मंत्रालयों के रुख को बताते हुए एक व्यापक हलफनामा दाखिल करने को कहा। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से देश भर की महिला वकीलों से सुझाव मांग कर कोर्ट में दाखिल करने को कहा।