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Independence Day 2024: फिर ‘सोने की चिड़िया’ होगा भारत, इन चुनौतियों से निपटना जरूरी

Independence Day 2024: माना जा रहा है कि कभी 'सोने की चिड़िया' कहे जाने वाले भारत का भविष्य स्वर्णिम है। भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। पढ़िए आकाश कुमार की विशेष रिपोर्ट...

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Independence Day 2024: आजादी के बाद भारत मात्र 77 साल मेंं भारत की उपलब्धियों ने दुनिया को चकित किया है। माना जा रहा है कि कभी 'सोने की चिड़िया' कहे जाने वाले भारत का भविष्य स्वर्णिम है। भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। देश 2027 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी और पांच ट्रिलियन डॉलर वाली इकोनॉमी बन जाएगा। फोर्ब्स के मुताबिक, अगले 10 साल यानी वर्ष 2034 तक आठ ट्रिलियन डॉलर तो जेफरीज और पीडब्ल्यूसी के मुताबिक, इसका आकार 10 ट्रिलियन डॉलर से अधिक होगा। भारतीय अर्थव्यवस्था अभी 3.94 ट्रिलियन डॉलर की है। पिछले 10 साल में भारतीय अर्थव्यवस्था औसतन 7 फीसदी की दर से बढ़ी है जिसके अगले 10 से 20 साल तक सालाना 10 फीसदी (जेफरीज के मुताबिक) की दर से बढऩे की उम्मीद है।

भारत की ताकत-

  • 30 साल से कम आबादी की औसत उम्र, इससे देश की उत्पादकता दुनियाभर में सबसे तेजी से बढ़ेगी
  • 16 करोड़ से अधिक नौकरियां अगले 10 साल में पैदा होने की उम्मीद, 80 करोड़ से ज्यादा लोग कामकाजी होंगे देश में
  • 10 फीसदी सालाना दर से बढ़ेगी देश की अर्थव्यवस्था अगले 10 से 20 साल तक, डेलॉयट और जेफरीज के मुताबिक,
  • 08 फीसदी आइएमएफ का विकास दर का अनुमान
  • 07 से 10 ट्रिलियन डॉलर का विदेशी निवेश अगले 5 साल में भारत में आने की उम्मीद
  • 06 फीसदी के करीब ग्लोबल जीडीपी में हिस्सेदारी होगी भारत की 2034 तक जो अभी 3 से कम

लक्ष्य की ओर बढ़ते कदमः-
विकास का पैरीमीटर - 2014 - 2024 - 2034
जीवन प्रत्याशा (साल में) - 68.07 - 72.24 - 80
प्रति व्यक्ति आय (रुपए में) 74,920 - 2,14,000 - 5,80,000
साक्षरता दर (कुल आबादी में) 69.1 फीसदी - 85.95 फीसदी - 98 फीसदी
कृषि उत्पादन (प्रति हैैैक्टेयर टन में) 04 - 6.09 - 7.4
वित्तीय समायोजन - 35 फीसदी - 64.2 फीसदी - 90 फीसदी
डिजिटल कनेक्टिविटी - 15 फीसदी - 52.4 फीसदी - 80 फीसदी
मैन्युफैक्चरिंग (जीडीपी में हिस्सेदारी) - 12 फीसदी - 17 फीसदी - 25 फीसदी
लॉजिस्टिक्स कॉस्ट (जीडीपी का) - 13.14 फीसदी - 8.9 फीसदी 6.7 फीसदी

ऐसे बढ़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था


(जीडीपी ट्रिलियन डॉलर में)
वर्ष आकार
2024 3.94
2025 4.34
2027 5.28
2029 6.43
2030 7.85
2032 8.56
2033 9.33
2034 10.40
(पीडब्ल्यूसी का अनुमान, बशर्ते इकोनॉमी सालाना नौ फीसदी की दर से बढ़े)

इन छह पर टिकी उम्मीदेंः-

1- मैन्युफैक्चरिंग: सरताज बनेगा
मेक इन इंडिया और पीएलआइ स्कीम का असर अब दिखने लगा है। विदेशी कंपनियां चीन छोडक़र भारत का रुख कर रही हैं। अगले 10 साल में भारत खुद को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित कर सकता है।
2- डिफेंस: साख से दुश्मन होंगे पस्त
रक्षा निर्यात लगातार बढ़ रहा है। 2023-24 में डिफेंस एक्सपोर्ट 25 फीसदी बढक़र 20,915 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। अगले 10 साल में भारत शीर्ष रक्षा निर्यातकों की सूची में टॉप 10 में और वर्ष 2040 तक टॉप-5 देशों में हो सकता है।
3- ग्रीन एनर्जीः महाशक्ति बनेगा देश
10 से 15 साल बाद भारत ग्रीन हाइड्रोजन मार्केट की महाशक्ति के तौर पर उभरता दिख रहा है। सरकार ने राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन की घोषणा की है और रीन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट के लिए इंसेटिव दे रही है।
4- स्टार्टअपः लिखेंगे नई इबारत
भारत में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है। अभी 1.30 लाख से अधिक रजिस्टर्ड स्टार्टअप और 100 से अधिक यूनिकॉर्न हैं। नैस्कॉम के मुताबिक, वर्ष 2034 तक देश में कम से कम 5 लाख रजिस्टर्ड स्टार्टअप होंगे।
5- स्टॉक मार्केट: सेंसेक्स 1,50,000 के होगा पार
भारतीय शेयर बाजार में अगले एक दशक तक तूफानी तेजी जारी रहेगी और अगले 10 साल में सेंसेक्स 1,50,000 के स्तर को पर कर 2,00,000 अंक तक पहुंच सकता है। बाजार में हर साल औसतन 12 फीसदी तेजी आने की उम्मीद है।
6- एआइ से बनेगा संचार क्रांंति का अग्रणी
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) को अपनाने में भारत सबसे आगे है। देश की करीब 91 फीसदी कंपनियां एआइ मॉडल्स का इस्तेमाल कर रही हैं। कंतार के मुताबिक, देश के 10 में से 9 इंटरनेट यूजर किसी न किसी तरह एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं।

चार चुनौतियों से निपटना जरूरी

1- असमान आय: देश की 73 फीसदी संपत्ति केवल 1 फीसदी अमीरों के पास, आय में समानता लाना जरूरी।
2- स्वास्थ्य: जीडीपी का केवल 1.9 फीसदी ही स्वास्थ्य पर खर्च के लिए आवंटित, इसे बढ़ाकर जीडीपी की 5 फीसदी करना होगा।
3- शिक्षा: युवा देश होने के बावजूद शिक्षा पर जीडीपी का केवल 2.6 फीसदी खर्च, इसे बढ़ाकर 6 फीसदी तक ले जाने की जरूरत
4- आरएंडडी: रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर जीडीपी का केवल 0.7 फीसदी खर्च, जबकि अमरीका में 2.8 फीसदी, चीन में 2.1 फीसदी और इजरायल में 4.3 फीसदी होता है खर्च

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