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इंडिया ब्लॉक की अहम बैठक आज, बदले राजनीतिक हालात में आज 23 विपक्षी दल जुटेंगे

INDIA Alliance: विपक्षी एकजुटता को मजबूती देने के लिए इंडिया ब्लॉक की बैठक आज नई दिल्ली में होगी। बैठक में चुनावी तालमेल, साझा नेतृत्व और राजनीतिक रणनीति जैसे अहम मुद्दों पर विचार होगा।
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भारत

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Satya Brat Tripathi

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Updated: 8 Jun 2026, 2:48 AM IST

INDIA Bloc leaders attend strategy meeting in New Delhi.

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे। (Photo- IANS)

INDIA Bloc Meeting: लोकसभा चुनाव के दो साल बाद बदले हुए सियासी हालात के बीच विपक्षी इंडिया ब्लॉक एक बार फिर अपनी राजनीतिक सक्रियता दिखाने की तैयारी में है। सोमवार यानी आज कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में होने वाली इंडिया ब्लॉक की बैठक में कई मुद्दों को लेकर संसद से सड़क तक सरकार के विरुद्ध राजनीतिक लड़ाई लड़ने की रणनीति तैयार होगी।

सूत्रों के अनुसार, बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, झारखंड मुक्ति मोर्चा, शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (शरद पवार गुट), सीपीएम, सीपीआई, आरएसपी, फॉरवर्ड ब्लॉक, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, भाकपा (माले), एमडीएमके, वीसीके, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी), वीआईपी पार्टी, केरल कांग्रेस, केरल कांग्रेस (मणि), बाप पार्टी और लोकदल सहित कुल 23 दलों के शामिल होने की पुष्टि हुई है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश के अनुसार बैठक का उद्देश्य केवल राजनीतिक समन्वय नहीं, बल्कि उन मुद्दों पर साझा रणनीति बनाना है जिन्हें विपक्ष लोकतंत्र, संविधान और आम जनता के हितों से जुड़ा मानता है। बैठक ऐसे समय हो रही है जब संसद का मानसून सत्र भी करीब है। विपक्षी दलों का प्रयास है कि संसद के भीतर और बाहर सरकार के विरुद्ध एक समन्वित अभियान चलाया जाए। साथ ही आगे की राजनीतिक कार्यक्रमों पर भी चर्चा हो सकती है।

इन मुद्दों पर होगा मंथन

  • मतदाता सूची पुनरीक्षण के जरिए लाखों लोगों को मतदान से वंचित किए जाने का आरोप।
  • विपक्षी नेताओं के खिलाफ जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का मुद्दा।
  • महंगाई और बढ़ती कीमतों से आम लोगों के घरेलू बजट पर असर और पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था, सीबीएसई विवाद।
  • अर्थव्यवस्था और विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति।

इंडिया ब्लॉक के रास्ते में कई चुनौतियां

  1. चुनावी तालमेल की चुनौती: कई राज्यों में गठबंधन के सहयोगी दल एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी हैं। राज्यवार समीकरण साधना आसान नहीं होगा। सीपीएम केरल को लेकर नाराजगी जता चुकी है। बंगाल भी उदाहरण है।
  2. साझा नेतृत्व का सवाल: गठबंधन के पास अब तक कोई औपचारिक संयोजक या सर्वमान्य चेहरा नहीं है, जिससे निर्णय प्रक्रिया प्रभावित होती है।
  3. राष्ट्रीय बनाम क्षेत्रीय प्राथमिकताएंः क्षेत्रीय दलों के अपने राज्य आधारित मुद्दे हैं, जबकि कांग्रेस राष्ट्रीय एजेंडे पर जोर देती है। दोनों के बीच संतुलन बनाना चुनौती है।
  4. भाजपा के नैरेटिव का जवाबः विपक्ष को केवल सरकार विरोध तक सीमित रहने के बजाय जनता के सामने वैकल्पिक राजनीतिक और आर्थिक एजेंडा भी पेश करना होगा।