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ऑपरेशन सिंदूर के अनुभव के बाद L-70 एंटी एयरक्राफ्ट गन होगी अपग्रेड, तैयार होंगे नए प्रोटोटाइप

L-70 Anti Aircraft Gun: ऑपरेशन सिंदूर के अनुभव के बाद एल-70 एंटी एयरक्राफ्ट गन को अपग्रेड किया जाएगा। जीसीएफ नए प्रोटोटाइप तैयार कर रही है, जिससे गन छोटे-बड़े ड्रोन और अन्य हवाई खतरों को अधिक सटीकता से ट्रैक कर नष्ट कर सकेगी।
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भारत

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Satya Brat Tripathi

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Updated: 8 Jun 2026, 2:21 AM IST

L-70 anti-aircraft gun upgrade for drone defence

ड्रोन वारफेयर के लिए अपग्रेड होगी एल-70 एंटी एयरक्राफ्ट गन। (Photo - bel-india.in)

L-70 Anti Aircraft Gun Upgrade: आधुनिक युद्ध में तेजी से बढ़ते ड्रोन खतरों को देखते हुए गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) ने 40 एमएम एल-70 एंटी एयरक्राफ्ट गन के उन्नयन की तैयारी शुरू कर दी है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीमा पर तैनाती के अनुभवों के बाद इस गन की तकनीक में बदलाव की आवश्यकता महसूस की गई। अब इसके कंप्यूटर प्रोग्राम और फायर कंट्रोल सिस्टम को इस तरह विकसित किया जाएगा कि यह दुश्मन के विमान के साथ-साथ छोटे और बड़े ड्रोन तथा अन्य फ्लाइंग ऑब्जेक्ट को भी सटीकता से ट्रैक कर नष्ट कर सके।

जीसीएफ का अनुसंधान एवं विकास विभाग इस परियोजना पर तेजी से काम कर रहा है और जल्द ही दो नए प्रोटोटाइप तैयार किए जाएंगे। 12 किलोमीटर से अधिक मारक क्षमता वाली यह गन भारतीय सेना की भरोसेमंद वायु रक्षा प्रणाली रही है। इसकी फायरिंग क्षमता एक मिनट में 600 राउंड तक है। नए ट्रैकिंग सिस्टम और बेहतर टारगेटिंग तकनीक के जरिए इसकी ड्रोन रोधी क्षमता को और मजबूत बनाया जाएगा।

अलग-अलग आब्जेक्ट के लिए प्रोग्रामिंग

मीडियम कैलिबर एंटी-एयरक्राफ्ट गन में पहले से कई आधुनिक फीचर मौजूद है। अब इसे अपग्रेड किया जा रहा है। ज्ञात हो कि ड्रोन वारफेयर युद्ध की एक आधुनिक तकनीक है जिसमें सैन्य रोबोट और मानवरहित हवाई वाहनों (यूएवी) का उपयोग किया जाता, उससे निपटने के लिए कई प्रकार के प्रोग्राम बदले जाएंगे। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब यह गन बॉर्डर पर तैनात थी तब इस जरूरत को महसूस किया गया।

विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे और बड़े ड्रोन को तबाह करने के लिए फायर कंट्रोल सॉल्यूशन में बदलाव किया जाएगा। बड़े ड्रोन को यह रडार और छोटों को इलेक्ट्रो ऑप्टिकल फायर कंट्रोल सिस्टम के जरिए ट्रेस करेगी। अपग्रेडेशन के बाद ड्रोन व फ्लाइंग ऑब्जेक्ट को ट्रेस करते हुए उसे आसानी से निशाना बना सकेगी। सेना के पास मौजूद एल-70 गनों की ओवरहॉलिंग फिलहाल जीसीएफ कर रही है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्धों में ड्रोन का बढ़ता उपयोग पारंपरिक वायु रक्षा प्रणालियों के लिए नई चुनौती बनकर उभरा है। इसी कारण दुनिया भर की सेनाएं अपनी एंटी-एयरक्राफ्ट प्रणालियों को ड्रोन रोधी क्षमताओं से लैस कर रही हैं। एल-70 गन का यह उन्नयन भारतीय सेना की वायु रक्षा क्षमता को और अधिक प्रभावी तथा आधुनिक बनाएगा।