
मानसून(एआई फोटो-चैट जीपीटी)
Monsoon In India: देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने फिर रफ्तार पकड़ ली है। मंगलवार को मानसून उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और लद्दाख के कई हिस्सों में पहुंच गया। अब तक देश के 26 प्रदेशों में मानसून सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार 24 जून को मध्य प्रदेश-गुजरात में एंट्री के छह दिन बाद मानसून की गति बढ़ी है, जिससे उत्तरी भारत में राहत की उम्मीद जगी है। अगले 2-3 दिनों में मानसून के राजधानी दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब और राजस्थान के कुछ हिस्सों तक पहुंचने की संभावना है। हवाएं अनुकूल रही तो एक सप्ताह के भीतर मानसून पूरे देश को कवर कर सकता है।
इधर IMD ने जुलाई माह का पूर्वानुमान जारी किया है। जिसके अनुसार जुलाई में पूरे देश की औसत मासिक वर्षा सामान्य से नीचे यानी दीर्घावधि औसत (एलपीए) की 94 प्रतिशत ही होगी। लेकिन उत्तर-पश्चिम भारत, उत्तर-पूर्व भारत, पूर्वी मध्य भारत में बारिश सामान्य या सामान्य से अधिक होने की संभावना है। आइएमडी के दीर्घावधि (1971-2020) आकलन के आधार पर जुलाई में देश की बारिश का एलपीए 280.4 मिमी है।
आइएमडी ने 1 से 4 जुलाई तक राजस्थान, दिल्ली, चंडीगढ़, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, उत्तराखंड, और हिमाचल प्रदेश समेत कुछ प्रदेशों में अति भारी बारिश का रेड अलर्ट तो 14 प्रदेशों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। कुछ इलाकों में 40-60 किमी प्रति घंटा या उससे अधिक तेज हवाओं के साथ आंधी-तूफान और मूसलाधार बारिश का खतरा है। 2 से 4 जुलाई तक कोंकण, मध्य महाराष्ट्र के घाट क्षेत्रों और दक्षिण गुजरात में कहीं-कहीं अति भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। 3 जुलाई को उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बन सकता है, जिससे उत्तर व मध्य भारत में मानसून और अधिक सक्रिय होगा।
आइएमडी के अनुसार कश्मीर से बंगाल तक लगभग 1500 किमी लंबी मानसून ट्रफ (कम दबाव की लंबी पट्टी) साफ दिख रही है। सैटेलाइट इमेज में यह ट्रफ उत्तरी बंगाल की खाड़ी से शुरू होकर हिमालय की तलहटी तक फैली हुई है। अगले कुछ दिनों में ट्रफ दक्षिण की ओर शिफ्ट होगी, जिसके परिणामस्वरूप 1 से 4 जुलाई तक उत्तर भारत में भारी बारिश होने की संभावना है।
आइएमडी के मुताबिक मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ रही हैं। मंगलवार को गुजरात के नवसारी जैसे इलाकों में भारी बारिश से जलभराव के हालात बन गए। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल में मानसून की एंट्री के साथ पूर्वांचल में तेज हवाओं और बारिश शुरू हो गई है। राजस्थान के कोटा व अलवर में प्री-मानसून की अच्छी बारिश हुई। पूर्वोत्तर भारत में मानसून की अधिक सक्रियता से कुछ दिन से बाढ़ के हालात बने हुए हैं। असम और अरुणाचल प्रदेश में लगातार बारिश से नदियां उफान पर हैं। असम में बाढ़ से छह जिलों में 22 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं।
देश के मौसम में 1901 के बाद साल 2026 में पांचवां सबसे सूखा जून दर्ज किया गया है। मौसम विभाग (आइएमडी) के आंकड़ों के अनुसार जून में सामान्य 165.3 मिमी बारिश की बजाय सिर्फ 99.5 मिमी बारिश हुई, जो लंबी अवधि के औसत से 39.8% कम है। मानसून के देरी से केरल पहुंचने और पश्चिमी कृषि क्षेत्रों में दो सप्ताह तक रुकावट के कारण यह स्थिति बनी। इससे धान, मक्का, कपास और सोयाबीन जैसी खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में गर्मी बनी रही, जहां कई जगहों पर अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा। इससे पहले 1905, 1926, 2009 व 2014 के जून सूखे रहे थे। इन सालों में सामान्य से कम बारिश हुई थी।
Updated on:
01 Jul 2026 07:25 am
Published on:
01 Jul 2026 06:26 am
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