
PMO का नया घर: अब सेवा तीर्थ में ही सभी कैबिनेट की बैठकें होंगी। फोटो में पीएम मोदी और कैबिनेट के मंत्री (इमेज सोर्स: आईएएनएस)
नई दिल्ली. देश का शासन अब अंग्रेजों के जमाने में बने साउथ ब्लॉक से नहीं बल्कि 'सेवा तीर्थ' से चलेगा। आजादी के बाद 78 साल तक साउथ ब्लॉक से चले प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) का शुक्रवार को पता बदल गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी ने नए पीएमओ, जिसे सेवा तीर्थ का नाम दिया गया है, का उद्घाटन किया। मोदी ने नए पीएमओ में पहले ही दिन महिलाओं, सड़क दुर्घटना पीडि़तों, किसानों और युवा उद्यमियों के हित में फैसले की फाइलों पर हस्ताक्षर कर सेवा तीर्थ का नाम सार्थक किया। इससे पूर्व साउथ ब्लॉक की ऐतिहासिक इमारत िस्थत पीएमओ में आखिरी कैबिनेट बैठक हुई। अब आगे से सेवा तीर्थ में ही सभी कैबिनेट बैठकें होंगी। सेवा तीर्थ की इमारत पर 'नागरिकदेवो भव' का संदेश अंकित है। मोदी ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत नए पीएमओ के अलावा मंत्रालयों के कार्यालय भवनों कर्त्तव्य भवन-1 और कर्त्तव्य भवन-2 का भी उद्घाटन किया।
'सेवा तीर्थ' में पहले दिन सेवा के यह फैसले
सड़क दुर्घटना पीड़ितों को 1.5 लाख तक का कैशलेस उपचार मिलेगा, ताकि इलाज के अभाव में किसी की जान न जाए। दुर्घटना पीडि़त को अस्पताल तक पहुंचाने वाले को भी इनाम मिलेगा।
मार्च 2029 तक 6 करोड़ लखपति दीदियों का एक नया लक्ष्य तय। सरकार ने मार्च 2027 की तय समय-सीमा से एक वर्ष से भी अधिक समय पहले 3 करोड़ लखपति दीदियों का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है।
एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के ऋण लक्ष्य को दोगुना कर 2 लाख करोड़ किया गया। देश की संपूर्ण एग्रीकल्चर वैल्यू चेन को मजबूत करने के लिए दिए जाएंगे ऋण। पहले यह लक्ष्य एक लाख करोड़ रुपए था।
नवाचार इकोसिस्टम को शक्ति प्रदान करने, डीप टेक, उन्नत विनिर्माण और ब्रेकथ्रू टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में, युवा उद्यमियों की मदद को 10,000 करोड़ के कॉर्पस के साथ स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 को मंजूरी ।
पीएम मोदी ने 'सेवा तीर्थ' और कर्तव्य भवन-1 और 2 के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि आज हम नया इतिहास बनते देख रहे हैं। साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतें ब्रिटिश सोच की हुकूमत को लागू करने के लिए बनी थीं, वहीं आज सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन जैसे परिसर भारत की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बने हैं। यहां से जो फैसले होंगे, वे किसी महाराजा की सोच को नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों की अपेक्षाओं को आगे बढ़ाने का आधार बनेंगे। यह आवश्यक है कि विकसित भारत की कल्पना केवल नीतियों और योजनाओं में ही नहीं, बल्कि हमारे कार्यस्थलों और इमारतों में भी दिखाई दे।
पीएम मोदी ने कहा कि विकसित भारत की यात्रा में यह बहुत जरूरी है कि भारत गुलामी की मानसिकता से मुक्त होकर आगे बढ़े। दुर्भाग्य है कि आजादी के बाद भी हमारे यहां गुलामी के प्रतीकों को ढोया जाता रहा। हमने गुलामी की मानसिकता को बदलने का अभियान शुरू किया। हमने वीरों के नाम पर नेशनल वॉर मेमोरियल, पुलिस स्मारक बनाया। रेसकोर्स का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग रखा गया। यह केवल नाम बदलने का निर्णय नहीं बल्कि सत्ता के मिजाज को सेवा की भावना में बदलने का पवित्र प्रयास था। इन प्रयासों के पीछे वैचारिक सूत्रता एक ही है-स्वतंत्र भारत की स्वतंत्र पहचान, गुलामी से मुक्त निशान।
नए पीएमओ का नाम सेवा तीर्थ है। सेवा की भावना ही भारत की आत्मा है। सेवा की भावना ही भारत की पहचान है। भारतीय संस्कृति का यही विचार पीएमओ और सरकार का विजन है। इसलिए सेवा तीर्थ केवल एक नाम नहीं, यह एक संकल्प है। सेवा तीर्थ यानी नागरिक की सेवा से पवित्र हुआ स्थल।
मोदी ने कहा कि आजादी के इतने सालों बाद भी दिल्ली सरकार के अनेक मंत्रालय दिल्ली के 50 से भी ज्यादा स्थानों से चल रहे हैं। प्रतिवर्ष इन स्थानों के किराये में डेढ़ हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो रहे हैं। हर रोज 8-10 हजार कर्मचारियों को एक इमारत से दूसरी इमारत में जाने का लॉजिस्टिक खर्च अलग होता था। अब यह खर्च कम होगा, समय बचेगा और प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी।
Updated on:
14 Feb 2026 01:45 am
Published on:
14 Feb 2026 01:41 am
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