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बदलते युद्ध की चुनौतियों के लिए तैयारी: नसीराबाद में तैयार की गई सेना की नई ‘भैरव फोर्स’

बदलते युद्ध की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना ने नसीराबाद में नई ‘भैरव फोर्स’ को विशेष प्रशिक्षण दिया है। इसमें आधुनिक तकनीक, ड्रोन ऑपरेशन और हाई-रिस्क मिशनों की तैयारी पर फोकस किया गया है।

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Bhairav Force: देश की सुरक्षा और नई चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय सेना की नई भैरव फोर्स कमांडो तैयार की गई है। इन्हें नसीराबाद में हाई-रिस्क ऑपरेशन के लिए प्रशिक्षण दिया गया है। इसके तहत 1 लाख से ज्यादा ड्रोन ऑपरेटर तैयार किए गए हैं।

वैश्विक स्तर पर युद्ध के बदलते मायनों और तकनीकी के बढ़ते इस्तेमाल के तहत नई भैरव फोर्स कमांड तैयार किए गए हैं। थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी भी सेना में नवाचार के पक्षधर हैं। सेना भी बदलाव के दशक से गुजर रही है। इसके तहत कमांडो को हाइब्रिड प्रशिक्षण दिया गया है। इन्हें युद्धों और आंतरिक मोर्चे में बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीकी, नए हथियारों, संचार और एआइ तकनीक की विस्तृत ट्रेनिंग दी गई है।

मालूम हो कि नसीराबाद में भारतीय सेना की ब्रिटिशकाल से छावनी है। 1818 में तत्कालीन ब्रिटिश जनरल डेविड ऑक्टरलोनी द्वारा इसकी स्थापना की गई थी। देश की सबसे बड़ी फायरिंग रेंज भी यहीं हैं।

हाई रिस्क ऑपरेशन का प्रशिक्षण

भैरव कमांडो फोर्स को खासतौर पर हाई-रिस्क ऑपरेशन के लिए तैयार किया गया है।। इन्हें जरूरत पड़ने पर कठिन अभियान और अति संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा।