
भारतीय रेलवे की सेवाओं में बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी को लेकर उपभोक्ता आयोग ने एक सख्त और अहम फैसला सुनाया है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, एसएएस नगर (मोहाली) ने एक मामले में रेलवे को सेवा में गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए 60,000 रुपये का जुर्माना लगाया है।
यह मामला एक वरिष्ठ नागरिक की उस परेशानी से जुड़ा है, जिन्हें 24 घंटे से अधिक समय तक ट्रेन यात्रा के दौरान शौचालय जैसी आवश्यक सुविधा से वंचित रहना पड़ा। आयोग ने इस घटना को यात्रियों के अधिकारों का उल्लंघन मानते हुए स्पष्ट किया कि रेलवे द्वारा दी जाने वाली सेवाओं में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता अनिवार्य है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है।
मोहाली निवासी सुरिंदर कुमार मुंशी ने 3-टियर एसी कोच में कन्फर्म बर्थ बुक कर जम्मू तवी-बांद्रा टर्मिनस स्पेशल एसी ट्रेन से यात्रा की थी। लेकिन यात्रा शुरू होने के बाद उन्हें पता चला कि कोच के सभी शौचालय बेहद गंदे और इस्तेमाल के लायक नहीं थे। मुंशी ने अपनी शिकायत में बताया कि उन्होंने कई बार टीटीई से इस समस्या की शिकायत की। टीटीई ने अंबाला, मथुरा, कोटा और रतलाम जैसे प्रमुख स्टेशनों पर सफाई कराने का आश्वासन दिया, लेकिन पूरी यात्रा के दौरान कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
आयोग की पीठ, जिसमें अध्यक्ष एस. के. अग्रवाल, सदस्य परमजीत कौर और लेफ्टिनेंट कर्नल जसबीर सिंह बाथ शामिल थे, ने रेलवे की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं यात्रा सेवा का अभिन्न हिस्सा हैं। रेलवे ने अपने बचाव में कहा था कि सफाई की जिम्मेदारी एक ठेकेदार की थी और अधिक उपयोग के कारण पानी की कमी हो सकती है। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि शौचालय सुविधा “सेवा” की श्रेणी में नहीं आती क्योंकि इसके लिए अलग शुल्क नहीं लिया जाता। हालांकि, आयोग ने स्पष्ट किया कि यात्रियों से लिया गया किराया इन सभी मूलभूत सुविधाओं को शामिल करता है और जिम्मेदारी ठेकेदार को सौंप देने से रेलवे अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकता।
30,000 रुपये शिकायतकर्ता सुरिंदर कुमार मुंशी को मुआवजे के रूप में दिए जाएं।
15,000 रुपये लीगल एड अकाउंट में जमा किए जाएं।
15,000 रुपये ट्राइसिटी कंज्यूमर कोर्ट्स बार एसोसिएशन को दिए जाएं।
आयोग ने विशेष रूप से यह माना कि शिकायतकर्ता एक वरिष्ठ नागरिक हैं और उन्हें 24 घंटे से अधिक समय तक शौचालय सुविधा से वंचित रहने के कारण गंभीर शारीरिक असुविधा, मानसिक तनाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। यह फैसला यात्रियों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल है। आयोग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि रेलवे जैसी बड़ी संस्थाओं को बुनियादी सुविधाओं में लापरवाही बरतने की कोई छूट नहीं दी जा सकती।
Updated on:
25 Apr 2026, 3:15 PM IST
Published on:
25 Apr 2026, 3:15 PM IST
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