9 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

‘आवारा’ से ‘हमारा’ तक… Aloka कैसे बना दुनिया की आंख का तारा? इस एक खूबी ने जीता बौद्ध भिक्षुओं का दिल

Dog walking with Buddhist monks: दुनिया को शांति का संदेश देने के लिए बौद्ध भिक्षुओं का एक समूह पैदल यात्रा पर निकला हुआ है। उनकी इस यात्रा में शामिल भारतीय नस्ल का एक डॉग लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।

2 min read
Google source verification
Story of Indian Street Dog Aloka

अलोका पूरी दुनिया में फेमस हो गया है। (PC: alokathepeacedog)

Aloka the peace dog: कभी भारत की सड़कों पर घूमने वाला एक स्ट्रीट डॉग पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। 'अलोका' नामक यह डॉग दुनिया को शांति, करुणा और एकता का संदेश दे रहा है। वह बौद्ध भिक्षुओं के साथ कदम ताल कर रहा है और उनकी शांति पदयात्रा का हिस्सा है। यह पदयात्रा 120 दिनों तक चलेगी और करीब 3,700 मील की दूरी तय करेगी। इस यात्रा का उद्देश्य लोगों में करुणा, शांति और एकता का संदेश फैलाना है।

इस तरह बदले दिन

'अलोका' के माथे पर दिल का निशान है। सोशल मीडिया पर उसे शांति के प्रतीक के तौर पर देखा जा रहा है। भारत की गलियों से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर छाने वाले 'अलोका' के दिन फिरने की शुरुआत तब हुई जब बौद्ध भिक्षुओं का एक दल भारत यात्रा के लिए आया। इस दौरान भूरे और सफेद रंग का यह डॉग उनके साथ पूरे 100 दिन पैदल चलता रहा। धूप, बारिश जैसी तमाम बाधाओं के बावजूद उसने बौद्ध भिक्षुओं का साथ नहीं छोड़ा। बौद्ध भिक्षुओं का समूह डॉग से इतना प्रभावित हुआ कि उसे हमेशा के लिए अपने साथ रख लिया।

चोट के बाद भी नहीं रुका

बौद्ध भिक्षुओं की भारत यात्रा के दौरान एक बार डॉग कार की चपेट में आ गया और बाद में गंभीर रूप से बीमार भी पड़ा। उसकी हालत को देखते हुए भिक्षुओं ने उसे आराम देने के लिए एक ट्रक में बैठा दिया, लेकिन उसने कुछ ही देर में ट्रक से छलांग लगा दी और फिर सड़क पर लौट आया। बाद में बौद्ध भिक्षुओं ने उसका नाम अलोका रख दिया। अलोका बौद्ध भिक्षुओं की शांति और सद्भाव की इस यात्रा का अभिन्न हिस्सा बन गया है और अमेरिका में भी उसकी यात्रा जारी है। अलोका का ‘द पीस डॉग’ नाम से अपना इंस्टाग्राम अकाउंट भी है। एक भिक्षु ने कहा कि वह पूरे समय हमारे साथ चला। वह एक सच्चा हीरो है। वह चलना चाहता था और यही बात हमें प्रेरित करती है।

हर पल रहता है साथ

अलोका अमेरिका के टेक्सास राज्य के फोर्ट वर्थ स्थित हुंग दाओ विपश्यना भवन में रहने वाले बौद्ध भिक्षुओं के साथ शांति यात्रा जारी रखे हुए है। अक्टूबर में 19 भिक्षुओं का यह समूह अपने साथी अलोका के साथ फोर्ट वर्थ से वॉशिंगटन डीसी तक 3,700 मील की पदयात्रा पर निकला। इस यात्रा का उद्देश्य लोगों में करुणा, शांति और एकता का संदेश फैलाना है। टेक्सास की प्रतिनिधि निकोल कॉलियर ने इस यात्रा को बेहद प्रेरणादायक बताया है। यह पदयात्रा करीब 110 दिनों में अमेरिका के 10 राज्यों से होकर गुजरेगी और फरवरी में वॉशिंगटन डीसी में समाप्त होगी। दिसंबर के अंत तक यह समूह अटलांटा तक पहुंच चुका था।

रास्ते में मिलता है प्यार और गिफ्ट

अलोका भिक्षुओं की शांति यात्रा का अभिन्न हिस्सा बन गया है। यात्रा के दौरान उसका नियमित रूप से चेकअप होता है। लोग रास्ते में उसे प्यार और उपहार भी देते हैं। भारत में 'आवारा' कहा जाने वाला यह स्ट्रीट डॉग अब सबका चहेता है। भारतीय पैरिया नस्ल का डॉग अलोका सोशल मीडिया सनसनी बन गया है, उसके चाहने वालों की लंबी-चौड़ी फौज है। एक आवारा कुत्ते से शांति के प्रतीक बनने की उसकी कहानी लोगों को प्रभावित करती है। मालूम हो कि पीस वॉक शांति को बढ़ावा देने वाला एक मार्च है। इसका लक्ष्य न केवल अमेरिका, बल्कि पूरी दुनिया में शांति, दया और करुणा का संदेश फैलाना है। अलोका इस अभियान में बराबर से उनका साथ दे रहा है और लोगों को प्रभावित कर रहा है।