
Nasa James Webb Space Telescope
अब सौर मंडल के बाहर, जीवन की खोज और रोशन करने वाले सितारों के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए निकलेगा नासा का जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप (James Webb Space Telescope), आपको बता दें कि ये ब्रिटेन के समयानुसार दोपहर करीब 12.20 बजे आज 25 दिसंबर यानी क्रिसमस के दिन यह फ्रेंच गुयाना (French Guiana) स्थित कौरु में यूरोपियन स्पेस एजेंसी के स्पेसपोर्ट से उड़ान भरेगा। ये योजना अगर सफल होती है तो तो अब तक अंतरिक्ष में भेजा जाने वाला ये सबसे बड़ा और सबसे शक्तिशाली टेलिस्कोप बन जाएगा। इस प्रोजेक्ट की ऑब्जर्वेटरी को तैयार करने में करीब 1000 करोड़ डॉलर लगे हैं। ये प्रोजेक्ट में नासा को करीब 30 साल से ज्यादा का समय लगा है।
ऐसे की जाएगी लॉन्चिंग सुनिश्चित:
यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि लॉन्च पैड पर अंतिम इलेक्ट्रिकल और सॉफ्टवेयर कॉन्फ़िगरेशन भी होगा। इस बीच, टीम यह सुनिश्चित करेगी कि लॉन्च के लिए सभी लाइटें हरी हों। सभी सिस्टमों में पावर है और लिफ्टऑफ़ से पहले काम कर रहे हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए इंजीनियर लॉन्च पैड पर एक अंतिम विजिबिलिटी टेस्ट किया जाएगा।
एरियन-5 जेम्स वेब टेलिस्कोप को कहां लेकर जाएगा:
एरियन 5 लॉन्च वाहन पर 26 मिनट की सवारी के बाद तैनात होने के बाद टेलीस्कोप छह महीने की कमीशन अवधि में होगा। एरियन 5 टेलीस्कोप को सीधे दूसरे लैग्रेंज पॉइंट (L2) में तैनात करेगा, जो चंद्रमा से लगभग चार गुना दूर और सूर्य से दूर दिशा में पृथ्वी से 1.5 मिलियन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
टेलीस्कोप एक्सोप्लैनेट की एक वाइड वैरायटी के वायुमंडल की स्टडी करेगा। यह जीवन के निर्माण खंडों को खोजने की उम्मीद में पृथ्वी के समान वायुमंडल की खोज करेगा और मीथेन, पानी, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड और जटिल कार्बनिक मॉलिक्यूल की भी खोज करेगा। 10 अरब डॉलर (लगभग 75,330 करोड़ रुपये) का जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप अब तक का बनाया गया सबसे बड़ा टेलीस्कोप है।
18 तस्वीरें जोड़ कर बनेगा मात्र एक फोटो:
नासा के सिस्टम इंजीनियर बेगोना विला ने बताया कि हम किसी भी तारे की एक तस्वीर नहीं देखेंगे। क्योंकि हमें हर षटकोण से उसकी तस्वीर मिलेगी, यानी एक ही ऑब्जेक्ट की 18 तस्वीरें एकसाथ। ये भी हो सकता है कि अलग-अलग षटकोण अलग-अलग तारों की तस्वीर ले रहे हों। ऐसे में हमारा काम ये बढ़ जाएगा कि कौन सा तारा क्या है। इसके लिए हमें इससे मिलने वाली सारी तस्वीरों को जोड़ना होगा। तब जाकर ये तय होगा कि इसमें कितने तारे या अन्य अंतरिक्षीय वस्तुएं दिख रही हैं।
जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप (James Webb Space Telescope - JWST) की दृष्टि यानी गोल्डेन मिरर की चौड़ाई करीब 21.32 फीट है। ये एक तरह के रिफलेक्टर हैं। जो कई षटकोण टुकड़ों को जोड़कर बनाए गए हैं। इसमें ऐसे 18 षटकोण लगे हैं। ये षटकोण बेरिलियम (Beryllium) से बने हैं। हर षटकोण के ऊपर 48.2 ग्राम सोने की परत लगाई गई है। ये सारे षटकोण एकसाथ मुड़कर इसे लॉन्च करने वाले रॉकेट के कैप्सूल में फिट हो जाएंगे। यह धरती से करीब 15 लाख किलोमीटर की दूरी पर अंतरिक्ष में स्थापित होगा। अंतरिक्ष में अगर यह सलामत रहा तो 5 से 10 साल काम करेगा, अगर इसे किसी उल्कापिंड या सौर तूफान ने नुकसान न पहुंचाया तो। इसके गोल्डेन मिरर को एयरोस्पेस कंपनी नॉर्थरोप ग्रुमेन ने बनाया है।
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Updated on:
25 Dec 2021 10:50 am
Published on:
25 Dec 2021 09:52 am
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