
जम्मू-कश्मीर में 58 प्राइवेट स्कूलों पर सरकार का नियंत्रण फाइल फोटो-पत्रिका
Jammu & Kashmir government: जम्मू-कश्मीर सरकार ने शनिवार 18 अप्रैल को प्रतिबंधित Jamaat-e-Islami (JEL) और उसके शिक्षा ट्रस्ट Falah-e-Aam Trust (FAT) से जुड़े 58 प्राइवेट स्कूलों का प्रबंधन अपने नियंत्रण में ले लिया है। स्कूल एजुकेशन डिपार्टमेंट (SED) के सेक्रेटरी ने इस संबंध में आदेश जारी किया है जिसमें संबंधित डिप्टी कमिश्नरों को इन स्कूलों का प्रबंधन संभालने का निर्देश दिया गया है। अधिकांश स्कूल उत्तरी कश्मीर में स्थित हैं। यह कदम छात्रों के हित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
FAT 1972 में JEL द्वारा स्थापित किया गया था। पहले यह ट्रस्ट राज्य में करीब 350 माध्यमिक स्कूल और हाई स्कूल चला रहा था। जिनमें से 300 कश्मीर घाटी में और 50 जम्मू क्षेत्र में थे। 1990 में ट्रस्ट पर प्रतिबंध के बाद ज्यादातर स्कूलों को स्थानीय मैनेजमेंट कमेटियों को सौंप दिया गया था। 2022 में लेफ्टिनेंट गवर्नर प्रशासन ने FAT ट्रस्ट को शिक्षा प्रदान करने से रोका था और डिप्टी कमिश्नरों को स्कूल सील करने का निर्देश दिया था। अब 58 फंक्शनल स्कूलों को जिनकी मैनेजिंग कमेटी की अवधि समाप्त हो चुकी थी या जिन पर इंटेलिजेंस एजेंसियों एजेंसियों की रिपोर्ट ठीक नहीं थी, सरकार ने उन पर सीधे नियंत्रण ले लिया है।
अगस्त 2025 में स्कूल एजुकेशन डिपार्टमेंट ने घाटी में 200 से ज्यादा प्राइवेट स्कूलों को लेने का आदेश जारी किया था क्योंकि वे प्रतिबंधित JEL से जुड़े थे। उस समय जम्मू कश्मीर शिक्षा मंत्री सकीना इतो ने नौकरशाही पर आरोप लगाया था कि आदेश में बिना उनकी जानकारी के संशोधन कर दिया गया। उन्होंने कहा था कि सरकार का फैसला छात्रों के हित में था और पास के सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपल इन स्कूलों की देखभाल करेंगे। अब नई कार्रवाई के साथ सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े संस्थानों पर सख्त नजर रखी जाएगी।
सरकार का कहना है कि इन स्कूलों का प्रबंधन लेने से शिक्षा की गुणवत्ता बनी रहेगी और नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) के अनुरूप काम होगा। छात्रों और स्टाफ को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। यह कदम सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट और इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर लिया गया है। JEL को केंद्र सरकार ने 2019 में प्रतिबंधित संगठन घोषित किया था। 1990 के गवर्नर जगमोहन मल्होत्रा के पुराने आदेश का भी हवाला दिया गया है जिसमें FAT पर प्रतिबंध लगाया गया था। उस समय हजारों शिक्षकों को सरकारी शिक्षा विभाग में समायोजित किया गया था।
Published on:
19 Apr 2026 06:42 pm
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