
जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में सोमवार को पुलिस ने चार सैनिकों की हत्या में शामिल आतंकियों के आठ सहयोगियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने कहा कि पकड़े गए आरोपी कठुआ-बानी-किश्तवाड़ में चार सैनिकों की हत्या और अन्य आतंकी संबंधी गतिविधियों में शामिल थे। जम्मू-कश्मीर पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है।भारतीय सेना ने पुंछ, राजौरी, कठुआ, डोडा, रियासी और उधमपुर जिले में 4,000 से अत्याधिक उच्च प्रशिक्षित सैनिकों को तैनात किया है। इनमें पैरा कमांडो और पर्वतीय युद्ध में प्रशिक्षित सैनिक शामिल हैं। ऐसी रिपोर्ट मिली थी कि इन जिलों के पहाड़ों में 40-50 कट्टर विदेशी भाड़े के आतंकवादी सक्रिय हैं। इन आतंकवादियों की हिट-एंड-रन रणनीति को विफल करने के लिए जम्मू संभाग के पहाड़ों की चोटियों और घने जंगलों वाले इलाकों में सेना और सीआरपीएफ को तैनात किया है।
पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों और भारतीय सुरक्षाबलों के बीच कई मुठभेड़ें हुई हैं। इनमें कई आतंकवादी और उनके कमांडर मारे गए हैं। सुरक्षा बलों को भी नुकसान उठाना पड़ा है। शुरुआत में पुंछ और राजौरी जिलों तक सीमित आतंकवादी गतिविधियां अब जम्मू के अन्य क्षेत्रों में फैल रही हैं, जो कुछ साल पहले तक ऐसी घटनाओं से अपेक्षाकृत मुक्त थे।
उच्च प्रशिक्षित आतंकवादी वाहनों पर घात लगाकर हमला कर रहे हैं और ग्रेनेड और कवच-भेदी गोलियों के साथ-साथ एम4 असॉल्ट राइफलों का इस्तेमाल कर रहे हैं। आतंकियों के अत्याधुनिक हथियारों के इस्तेमाल से खतरा बढ़ा है। इनके लगातार हमलों ने चिंता बढ़ा दी है। सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में कश्मीर घाटी को जम्मू से अलग करने वाले पीर पंजाल क्षेत्र में आतंकी गतिविधियां बढ़ी हैं।
कश्मीर में जारी आतंकवाद विरोधी अभियानों ने आतंकवादियों को पहाड़ों पर धकेल दिया है। वहां वे छिपते हैं और मौका पा सुरक्षा बलों पर हमला कर देते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि जम्मू में बढ़ते आतंकवाद से निपटने के लिए एक व्यापक रणनीति की आवश्यकता है। इसमें खुफिया जानकारी जुटाना और सुरक्षा बलों के बीच बेहतर तालमेल शामिल है। लगातार जारी आतंकी हमलों से निपटने के लिए सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
Updated on:
12 Aug 2024 09:00 pm
Published on:
12 Aug 2024 08:44 pm
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