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जोशीमठ के लोगों का दर्द : बार-बार मुड़कर देख रहे घर, मन में एक सवाल, अब लौटेंगे भी या नहीं

Joshimath people pain जोशीमठ भू-धंसाव मामला जोशीमठ की जनता के लिए दर्द का एक तूफान लेकर आ गया है। सरकारी अधिकारी आए और लाल निशान लगाया और कहा घर खाली कर दें। पीड़ितों का मन बोझिल है। पैर भारी है। दिल घर छोड़कर जाने को नहीं कर रहा है। आंखों में आंसू हैं। माथे पर शिकन है। अब कहां जाएंगे...। पढ़िए जोशीमठ से विस्थापित हो रहे लोगों का दर्द।

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जोशीमठ के लोगों का दर्द : बार-बार मुड़कर देख रहे घर, मन में एक सवाल, अब लौटेंगे भी या नहीं

उत्तराखंड का जोशीमठ धंस रहा है। भू-धंसाव की वजह से सैकड़ों मकानों में दरारें आ गईं है। और उन्हें असुरक्षित घोषित कर दिया गया है। जोशीमठ में आई आपदा से लोग गमजदा हैं। इन असुरक्षित मकानों से कोई बड़ा हादसा न हो जाए इसलिए प्रशासन लोगों को राहत शिविरों में पहुंचा रहा है। पर लोगों का मन भारी है। कदम उठ नहीं रहे हैं। पुरखों की ओर से बनाए और अपनी जमा पूंजी लगाकर खड़े किए सपनों के घरों को छोड़ने का मन किसी का नहीं कर रहा है। लोग भावुक हो रहे हैं। भारी मन से घर का सामान कंधे पर रखकर शिविर की ओर जा रहे हैं। बार-बार मुड़कर अपने घर को देख रहे हैं। और यह सवाल कर रहे हैं कि, अब कब घर लौटेंगे। या लौटेंगे भी नहीं। सब भगवान के भरोसे छोड़कर चल दिए हैं। जोशीमठ भू-धंसाव के चलते घर खाली कर रहे स्थानीय लोग बेहद भावुक हैं।

वह आए लाल निशान लगाया, कहा घर खाली कर दो - बिंदू

जोशीमठ भू-धंसाव मामले में पीड़ित महिला बिंदू ने अपने दर्द को बयान करते हुए कहाकि, हमारा 60 साल का आशियाना एक पल में खत्म हो गया। हमें नहीं पता कि हम कहां जाएंगे। हमें सरकार से कुछ भी मदद नहीं मिली। वह (सरकारी अधिकारी) आए और लाल निशान लगाया और (घर) खाली करने के लिए कह दिया।

हमारा बचपन यहीं बीता है, घर खाली करने को बोल रहे हैं - मनीष

जोशीमठ भू-धंसाव मामले पर पास में खड़े एक और पीड़ित व्यक्ति मनीष ने कहाकि, हमारा बचपन यहीं बीता है। हमको अचानक घर खाली करने के लिए बोल रहे हैं। शासन-प्रशासन को परवाह नहीं है, वह (अधिकारी) हमारे पास आए और घर खाली करने के लिए बोले। हमारे परिवार में 7-8 लोग हैं। हमने पहले भी कई बार इसके बारे में सरकार को बताया था।

सरकार जो निर्णय लेगी उत्तराखंड पुलिस उसका पालन कराएगी - DGP

देहरादून में उत्तराखंड DGP अशोक कुमार ने बताया कि, देहरादून स्थानांतरण का कार्य जारी है। SDRF, NDRF की टीमें पहुंच गई है। राज्य सरकार जो भी निर्णय लेगी उसका उत्तराखंड पुलिस पालन कराएगी।

जो भी मकान खतरे में हैं उसे गिराया जा रहा है

उत्तराखंड DGP अशोक कुमार ने आगे कहाकि, मैं जोशीमठ गया था। हमने मौके का जायजा लिया। वहां बहुत से कार्य हो रहे हैं। जो भी मकान खतरे में हैं उसे गिराया जा रहा है। पहले 603 थे अब 678 हो गए हैं। कुछ लोगों को स्थानांतरित किया गया है, 87 घरों के लोगों को शिफ्ट किया गया है।

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