
लोकसभा चुनाव 2019 से पहले एक नेता की निर्मम हत्या के मामले में कोर्ट ने पांच आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई है। हत्या के इस मामले में एक नाबालिग भी शामिल था, जिसे बाल सुधार गृह भेजा गया है। इस मामले में कुल 53 गवाहियां दी गई थी।
सनसनीखेज राम चंद्र बेहरा हत्याकांड में क्योंझर जिले के आनंदपुर में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अदालत ने 53 गवाहों के बयानों के आधार पर उन्हें मौत की सजा सुनाई। उनकी पहचान संजीत प्रस्टी, अजीत प्रस्टी, अरुण प्रस्टी, आलेख प्रस्टी और डोला बोइतेई के रूप में की गई है।
कैसे हुई थी हत्या
25 मार्च, 2019 की शाम को, राम चंद्र बेहरा, जो बीजद पार्टी में शामिल होने के लिए तैयार थे, उन्हें घर से बहला-फुसलाकर ले जाया गया और संजीत प्रस्टी, अजीत प्रस्टी, अरुण प्रस्टी, आलेख प्रस्टी और डोला बोइतेई ने बेरहमी से हत्या कर दी। अपराध की क्रूरता तब उजागर हुई जब हत्यारों ने बेहरा के कटे हुए हाथों को लेकर पूरे गांव में घुमाया। इतना ही नहीं बल्कि आश्चर्यजनक रूप से उसका मांस भी खाया, जो न सिर्फ आपराधिक था बल्कि बर्बर था। इस जघन्य अपराध का एक वीडियो भी बनाया गया और उसे वायरल भी किया गया।
बेहरा के परिवार की शिकायत के बाद, भारतीय दंड संहिता और शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत गहन जांच शुरू की गई। 11 व्यक्तियों की गिरफ्तारी के बावजूद, अंततः एक किशोर सहित छह के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया। 53 गवाहों की गवाही के आधार पर चलाए गए मुकदमे में बड़ी मेहनत से बेहरा की हत्या के कोर्ट ने आरोपियों को मौत की सजा का हकदार माना।
Published on:
06 Mar 2024 10:24 pm
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