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Kargil Vijay Diwas 2022: शरीर में धंसी थीं 15 गोलियां, फिर भी दुश्मनों के छुड़ाए छक्के, जानिए करगिल के इन हीरो की शौर्य गाथा

Kargil Vijay Diwas 2022 : वीर योद्धाओं ने अपने खून से देश की माटी को सींचा है। आज पूरा देश उनकी वीर गाथा गा रहा है। हिमालय की ऊंची बर्फीली चोटी से रेगिस्तान के तपते रेत वीर जवानों की शहादत को याद किया जा रहा है। कारगिल की जंग दो महीने तीन हफ्ते और दो दिन तक तीन मई से 26 जुलाई, 1999 के बीच चली थी। अदम्य साहस का परिचय देने के लिए सरकार ने उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया।

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Kargil Vijay Diwas 2022

Kargil Vijay Diwas 2022

Kargil Vijay Diwas 2022 : आज करोड़ों देशवासियों जिस खुली हवा में सांस ले रहे हैं वो यूं ही नहीं मिली। इसके लिए देश की सेना के जवानों ने अनेक कुर्बानियां दी हैं। वीर योद्धाओं ने अपने खून से देश की माटी को सींचा है। आज पूरा देश उनकी वीर गाथा गा रहा है। हिमालय की ऊंची बर्फीली चोटी से रेगिस्तान के तपते रेत वीर जवानों की शहादत को याद किया जा रहा है। आज यानी 26 जुलाई के दिन कारगिल जंग में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सैनिकों को सम्मानित करने और जंग में जीत की याद को विजय दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इसी दिन 1999 में भारत ने पाकिस्तान को कारगिल युद्ध में हार का मुंह दिखाया था। कारग‍िल युद्ध दो महीनों से अध‍िक समय तक लड़ा गया था। इसमें पाक‍िस्‍तान के ख‍िलाफ जीत को ऑपरेशन व‍िजय का नाम द‍िया गया। 26 जुलाई को भारतीय सेना ने पाक‍िस्‍तान के कब्‍जे वाली चोटी पर त‍िरंगा फहराया।

562 जवान हुए थे शहीद
भारतीय सेना के हुए करीब 562 जवान शहीद ऊंची पहाड़ियों पर घुसपैठ कर 3 मई को जंग का ऐलान कर दिया था। दो महीने से भी ज्यादा समय तक चले इस युद्ध में भारतीय सेना के करीब 562 जवान शहीद हुए थे। वहीं 1,363 अन्य घायल हुए थे। पाकिस्तान ने पीठ पर वार करते हुए कारगिल समेत कई भारतीय भूभाग पर कब्जा कर लिया तो देश के वीर जवानों ने मोर्चा संभालते हुए ना सिर्फ उन क्षेत्रों को फिर से हासिल किया बल्कि पाकिस्तान को हार का ऐसा स्वाद चखाया। आज आपको उन वीर जवानों के बारे में बता रहे है जिन्होंने इस जंग में सब कुछ न्यौछावर कर दिया था। भारत सरकार ने उनको परमवीक चक्र से सम्मानित किया।


कैप्टन विक्रम बत्रा
हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में जन्मे कैप्टन विक्रम बत्रा को कारगिल युद्ध के हीरो है। विक्रम बत्रा 13वीं जम्मू एंड कश्मीर राइफल्स में शामिल थे। उन्होंने विक्रम तोलोलिंग पर पाकिस्तानी बंकर पर कब्जा किया। अपने साथियों के लिए 7 जुलाई 1999 को पाकिस्तानी सैनिकों से सीधे भिड़ गए। आज उस जगह को लोग बत्रा टॉप के नाम से जानते है। भारत सरकार ने शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा को परमवीर चक्र देकर सम्मानित किया था।

कैप्टन मनोज कुमार पांडे
कैप्टन मनोज कुमार पांडे गोरखा राइफल्स के फर्स्ट बटालियन का हिस्सा रहे थे। उन्होंने ऑपरेशन विजय का महानायक की भूमिका निभाई। कैप्टन मनोज कुमार पांडे के नेतृत्व में ही सेना की टुकड़ी ने जॉबर टॉप और खालुबर टॉप पर वापस कब्जा किया था। घायल होने के बावजूद उन्होंने तिरंगा को टॉप पर लहराया। सरकार ने उनको परमवीर चक्र से सम्मानित किया है।

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राइफल मैन संजय कुमार
कैप्टन मनोज कुमार पांडे कारगिल युद्ध में अहम योदान दिया था। अपने अदम्य साहस का परिचय देते हुए स्काउट टीम के साथ उन्होंने फ्लैट टॉप पर कब्जा जमाया। संजय कुमार गोली लगने के बाद भी दुश्मनों से डट कर मुकाबला किया।

मेजर पदमपानी आचार्य
कारगिल युद्ध में मेजर पदमपानी आचार्य ने भी दुश्मनों से लोहा लिया था। आचार्य राजपूताना राइफल्स की बटालियन में थे। 28 जून 1999 को लोन हिल्स पर वीरगति को प्राप्त हो गए। सरकार ने मरणोपरांत उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया।

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कर्नल सोनम वांगचुक
कर्नल सोनम वांगचुक ने भी अपने अदम्य साहस का परिचत देते हुए दुश्मन की सेना से लोहा लिया। वांगचुक लद्दाख स्काउट रेजिमेंट में अधिकारी थे। युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सैनिकों से लड़ते हुए कॉरवट ला टॉप पर वीरगति को प्राप्त हो गए। उनको भी मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।

कैप्टन एन केंगुर्सू
शहीद कैप्टन एन केंगुर्सू ने कारगिल युद्ध के मैदान में से दुश्मनों को खदेड़ दिया था। ऑपरेशन विजय के दौरान लोन हिल्स पर 28 जून 1999 को शहीद हो गए। इस योद्धा को सरकार ने मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया था।

परमवीर चक्र योगेंद्र यादव
कारगिल युद्ध के दौरान 15 गोलियां लगने के बाद भी योगेंद्र यादव ने पाक सैनिकों को ढेर कर अपनी बहादुरी से टाइगर हिल पर तिरंगा झंडा फहराया था। योगेंद्र यादव की इस बहादुरी के लिए उन्हें को 19 साल की उम्र में सेना के सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र से नवाजा गया।


कैप्टन अनुज नैय्यर
शहीद कैप्टन अनुज नैय्यर कारगिल युद्ध में दुश्मनों से आखिरी सांस तक जंग लड़ी। नैय्यर जाट रेजिमेंट की 17वीं बटालियन का हिस्सा था। उनकी वीरता और साहस के लिए भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया।

ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव
कमांडो घटक प्लाटून को गाइड करने वाले ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव ने भी इस युद्ध में अहम भूमिका निभाई थी। योगेंद्र सिंह एक चक्र के साथ टाइगर हिल पर एक स्ट्रैटजी बनाकर बंकर पर हमला किया था। कारगिल युद्ध के दौरान 4 जुलाई को ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव शहीद हो गए। सरकार ने उनको परमवीर चक्र से सम्मानित किया।

नायक दिगेंद्र कुमार
कारगिल युद्ध में नायक दिगेंद्र कुमार का भी अहम रोल था। उन्होंने सीने पर तीन गोलियां खाने के बाद हिम्मत नहीं हारी और अकेले ही 11 पाकिस्तानी बंकरों को नष्ट कर दिया। दिगेन्द्र ने पाकिस्तानी मेजर अनवर खान को मौत के घाट उतार सेना की जीत सुनिश्चित की। सरकार ने उनको परमवीर चक्र से सम्मानित किया।

मेजर राजेश सिंह अधिकारी
कारगिल युद्ध के दौरान मेजर राजेश सिंह अधिकारी ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। घायल होने के बाद भी उन्होंने सबयूनिट को निर्देशित करना जारी रखा और दुश्मन की स्थिति पर कब्जा कर करके उन्हें भगा दिया। अदम्य साहस का परिचय देने के लिए सरकार ने उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया।