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सीएम पद संभालते ही डीके शिवकुमार के सामने विपक्ष ने रखी चुनौती, केरल की तरह श्वेत पत्र लाने की उठाई मांग

Karnataka Congress: कर्नाटक में बीजेपी ने राज्य सरकार से वित्तीय व्हाइट पेपर जारी करने को कहा है। विपक्ष ने कर्ज, खर्च और आर्थिक पारदर्शिता को मुद्दा बनाते हुए कांग्रेस सरकार पर सवाल उठाए हैं और केरल सरकार के कदम का उल्लेख करते हुए वित्तीय व्हाइट पेपर पेश करने की मांग की है।
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बैंगलोर

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Himadri Joshi

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Updated: 4 Jun 2026, 3:43 PM IST

Leader of the Opposition in Karnataka Assembly R. Ashoka

कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक (फोटो- एएनआई)

Karnataka Congress: कर्नाटक की वित्तीय स्थिति को लेकर राज्य की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस सरकार पर आर्थिक कुप्रबंधन और अत्यधिक कर्ज का आरोप लगाते हुए विस्तृत वित्तीय व्हाइट पेपर जारी करने की मांग की है। विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि राज्य की वास्तविक आर्थिक हालत क्या है और पिछले वर्षों की नीतियों का बोझ भविष्य की पीढियों पर कितना पड़ा है। उन्होंने केरल सरकार द्वारा पेश किए गए वित्तीय व्हाइट पेपर का उदाहरण देते हुए कर्नाटक सरकार से भी इसी तरह पारदर्शिता अपनाने की अपील की है।

राज्य पर कुल कितना कर्ज है यह बताए सरकार- बीजेपी

बीजेपी नेता आर. अशोक ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से कहा कि राज्य विधानसभा में बिना देरी विस्तृत वित्तीय व्हाइट पेपर पेश किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों के दौरान वोट बैंक राजनीति और अनियंत्रित खर्च के कारण राज्य की आर्थिक स्थिति कमजोर हुई है। अशोक ने सवाल उठाया कि राज्य पर कुल कितना कर्ज है, वास्तविक राजकोषीय स्थिति क्या है और आने वाले वर्षों में इसका असर कितना गंभीर हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है तो उसे जनता के सामने सभी वित्तीय आंकड़े रखने चाहिए। बीजेपी लगातार यह दावा कर रही है कि कांग्रेस सरकार की नीतियों के कारण विकास कार्य प्रभावित हुए हैं और राज्य कर्ज के भारी दबाव में पहुंच गया है।

आर. अशोक ने दिया केरल का उदाहरण

आर. अशोक ने केरल सरकार के कदम का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां वित्तीय व्हाइट पेपर पेश कर जनता के सामने आर्थिक स्थिति स्पष्ट की गई। उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार को भी इसी तरह पारदर्शी रुख अपनाना चाहिए। बीजेपी का मानना है कि राज्य की वित्तीय हालत को लेकर स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक होने से लोगों को सरकार की आर्थिक नीतियों का वास्तविक असर समझने में मदद मिलेगी। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने कई लोकलुभावन योजनाओं पर अत्यधिक खर्च किया है, जिससे दीर्घकालिक वित्तीय दबाव बढ़ा है। इस मुद्दे पर विधानसभा के आगामी सत्र में भी तीखी बहस होने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह विवाद आने वाले चुनावों में भी अहम मुद्दा बन सकता है।

सिद्धारमैया कर चुके आरोपों से इनकार

पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पहले ही इन आरोपों को खारिज कर चुके हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल के अंतिम प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि राज्य की गारंटी स्कीम्स ने खजाने को नुकसान नहीं पहुंचाया। उनके अनुसार कर्नाटक देश में वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह में महाराष्ट्र के बाद दूसरे स्थान पर है। उन्होंने यह भी कहा था कि राज्य की विकास दर 8.1 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत 7.4 प्रतिशत से अधिक है। सिद्धारमैया ने दावा किया कि वित्तीय जिम्मेदारी कानून के तहत राजकोषीय घाटा 3 प्रतिशत की सीमा के भीतर रखा गया और कुल कर्ज सकल राज्य घरेलू उत्पाद के लगभग 24.94 प्रतिशत तक सीमित रहा। कांग्रेस सरकार इन आंकड़ों को अपनी मजबूत आर्थिक नीति का प्रमाण बता रही है।