
मृतक राजा रघुवंशी की मां उमा रघुवंशी (सोर्स: ANI)
Raja Raghuvanshi Murder Case Update:राजा रघुवंशी हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है। कोर्ट ने मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी की बेल रद्द कर दी है। सोनम को दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद राजा के भाई सचिन रघुवंशी ने बड़ा बयान दिया है। जबकि मां उमा रघुवंशी भी भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि आखिरकार सच की जीत हुई है। उनके बेटे को पूरा इंसाफ मिलेगा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राजा रघुवंशी की मां उमा रघुवंशी ने अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि एक मां के तौर पर उनका भरोसा फिर से मजबूत हुआ है। इतने समय से वह इसी फैसले का इंतजार कर रही थीं। क्योंकि उनका बेटा पूरी तरह बेगुनाह था। उसकी कोई गलती नहीं थी।
उन्होंने आगे कहा कि कोर्ट का फैसला सही है। अभी अंतिम सजा मिलना बाकी है, लेकिन उन्हें पूरा विश्वास है कि आखिर में न्याय जरूर मिलेगा। सच कभी हारता नहीं है और एक दिन जीत उसी की होती है।
वहीं राजा रघुवंशी के भाई सचिन रघुवंशी ने भी फैसले का स्वागत किया। उन्होंने मेघालय सरकार का धन्यवाद किया, जिसने बेल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। साथ ही उन्होंने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की भी सराहना की।
सचिन ने कहा कि परिवार अब चाहता है कि सभी आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले। उनका कहना है कि दोषियों को उम्रकैद तक की सजा मिलनी चाहिए। वहीं, राजा के दूसरे भाई विपिन रघुवंशी ने कहा कि यह सच की जीत और झूठ की हार है। उन्होंने मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में कराने की मांग भी की। साथ ही कहा कि नार्को टेस्ट से कई छिपे हुए तथ्य सामने आ सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ ने सोनम रघुवंशी की बेल रद्द कर दी। कोर्ट ने कहा कि मौजूदा स्थिति में आरोपी का बाहर रहना ट्रायल को प्रभावित कर सकता है। इसलिए उसे दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करना होगा। हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि छह महीने के भीतर ट्रायल पूरा नहीं होता है, तो सोनम दोबारा बेल के लिए आवेदन कर सकती है।
बता दें कि मेघालय सरकार ने बेल आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। जांच एजेंसियों का आरोप है कि शादी के बाद हनीमून के दौरान मेघालय में राजा रघुवंशी की हत्या की साजिश सोनम ने अपने तीन साथियों के साथ मिलकर रची थी। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने माना कि निचली अदालतों द्वारा दी गई बेल उचित नहीं थी।
Updated on:
23 Jul 2026 06:48 pm
Published on:
23 Jul 2026 06:30 pm
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