2 नवंबर 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

बंद होने की कगार पर था सरकारी स्कूल: प्रिंसिपल ने किया कुछ ऐसा, अब दाखिले के लिए लग रही लाइन

Government school: सरकारी स्कूल के प्रधानाध्यापक सिद्धामल्ला खोत ने बताया कि शिक्षकों की टीम के प्रयासों के परिणाम सामने आने लगे हैं। स्कूल में नामांकन में बढ़ोतरी हुई है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

बैंगलोर

•

image

Shaitan Prajapat

•

Updated: 24 Feb 2025, 9:58 AM IST

Government School: देशभर में निजी स्कूलों के बढ़ते प्रभाव के बीच सरकारी स्कूलों के नामांकन कम होते जा रहे हैं। इससे कई स्कूल बंद होने का खतरा पैदा हो गया है। कर्नाटक के बेलगावी जिले के अदहालट्टी गांव (हिप्पारागी टोटा) के कन्नड़ सरकारी स्कूल के प्रधानाध्यापक सिद्धामल्ला खोत ने छात्र-छात्राओं का नामांकन बढ़ाने के लिए अनूठी पहल की है। उन्होंने अपनी जेब से स्कूल में दाखिला लेने वाले प्रत्येक नए छात्र-छात्रा के लिए 1000 रुपए की फिक्स डिपॉजिट जमा कराने का ऐलान किया है। यह राशि 18 साल बाद परिपक्व होगी।

मासिक क्विज प्रतियोगिताएं शुरू

प्रधानाध्यापक सिद्धामल्ला खोत ने बताया कि शिक्षकों की टीम के प्रयासों के परिणाम सामने आने लगे हैं। स्कूल में नामांकन में बढ़ोतरी हुई है। खोत ने जुलाई 2023 में स्कूल के प्रधानाध्यापक बनने के बाद कई कार्यक्रम शुरू किए। मासिक क्विज प्रतियोगिताएं शुरू करवाई। गांव के युवाओं के लिए कार्यशाला शुरू की, ताकि उनका लगाव स्कूल से हो सके। दानदाताओं की मदद से स्कूल में सुविधाएं भी विकसित कर रहे हैं।

2 छात्र थे, 9 बच्चों ने लिया दाखिला

खोत ने बताया कि पिछले साल कक्षा 1 में केवल दो छात्र थे। ऐसे में नए नामांकन जरूरी थे। इस साल 1000 रुपए की एफडी की योजना शुरू करने के बाद पहली कक्षा में नौ बच्चों ने दाखिला लिया। योजना से बदलाव साफ नजर आ रहा है। उम्मीद है कि कुछ दिनों में 40 बच्चों का नामांकन होगा।

यह भी पढ़ें- सरकारी इंग्लिश मीडियम स्कूल पर गरमाई सियासत, गहलोत ने सरकार से पूछा- गरीब के बच्चे कहां जाएंगे?

पिछले साल केवल 18 छात्र बचे थे

खोत ने बताया कि 2005 में स्थापित स्कूल में 2015 तक कक्षा 1 से 7 तक 60 से 70 छात्र-छात्राएं थे। हाल के वर्षों में शिक्षकों की कमी और अपर्याप्त बुनियादी ढांचे के कारण नामांकन में गिरावट आई है। पिछले साल केवल 18 छात्र बचे थे, जिससे स्कूल बंद होने की कगार पर पहुंच गया था।