
कर्नाटक सरकार ने रविवार को ओला और उबर जैसे ऐप-आधारित कैब एग्रीगेटर्स के साथ-साथ गैर-ऐप-आधारित सिटी टैक्सी सेवाओं पर लागू एक निश्चित किराया नियम पेश किया। इस कदम का उद्देश्य किराये में बढ़ोतरी के संबंध में चिंताओं को दूर करना और यात्रियों और ड्राइवरों के लिए एक सुसंगत मूल्य निर्धारण संरचना प्रदान करना है।
वाहनों की कीमत और प्रति किलोमीटर के हिसाब से होगा किराया
घोषणा में टैक्सी वाहनों को उनकी लागत के आधार पर तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है- 1.10 लाख रुपये या उससे कम कीमत वाले वाहनों के लिए, 2. शुरुआती चार किलोमीटर के लिए 100 रुपये निर्धारित किया गया है और चार किलोमीटर के बाद प्रति किलोमीटर 24 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा। 2. 10 लाख से 15 लाख रुपये के दायरे में आने वालों के लिए वाहनों के लिए पहले चार किलोमीटर के लिए न्यूनतम किराया ₹ 115 और उसके बाद के प्रत्येक किलोमीटर के लिए 28 रुपये किराये की वसूली होगी। 3. 15 लाख रुपये या उससे अधिक की लागत वाले वाहनों पर शुरुआती चार किलोमीटर के लिए 130 रुपये का निश्चित किराया होगा। इसके साथ ही प्रत्येक अतिरिक्त किलोमीटर के लिए 32 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लगेगा।
नए नियम का एक उल्लेखनीय पहलू ऐप-आधारित कैब सेवाओं के लिए किराए में बढ़ोतरी को समाप्त करना है। पहले किराए में बढ़ोतरी यात्रियों के बीच विवाद की एक मुख्य वजह बनती रही थी। खासतौर पर पीक आवर्स के दौरान बढ़े हुए किराए की शिकायतें अक्सर सामने आती थीं।
कैब एसोसिएशन ने किया स्वागत लेकिन...
इस कदम का एक ओर ओला और उबर एसोसिएशन ने स्वागत किया है, वहीं दूसरी ओर कुछ यात्रियों ने बढ़े हुए फिक्स चार्ज को लेकर चिंता व्यक्त की है। इस नियम के बनने से पहले सवारी को चार किलोमीटर की सवारी के लिए 75 रुपये का शुल्क देना होता था लेकिन नए नियमों के अनुसार अब कम से कम 100 रुपये देना होगा।
यात्रियों ने पत्रिका को बताई अपनी परेशानी
ओला और उबर यूजर्स पारूल अग्रवाल समेत कई अन्य कैब यूजर्स ने पत्रिका डॉटकॉम से बताया कि हम ओला और उबर की स्कीम के हिसाब से अपना ट्रैवल प्लान करते थे। पीक आवर्स को छोड़कर ट्रेवल करना कई बार हमें बहुत सस्ता पड़ता था लेकिन अब कभी भी ट्रेवल करने पर यह ज्यादा और फिक्स्ड होगा।
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Published on:
05 Feb 2024 12:34 pm
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