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KBC Lottery Scam: अमिताभ बच्चन का डीपफेक वीडियो और RBI का फर्जी लेटरहेड, केबीसी लॉटरी के नाम पर ऐसे ऐंठे 13.51 लाख रुपये

KBC Lottery Scam: फर्जी KBC लॉटरी के नाम पर लोगों को ठगने वाले एक अंतरराज्यीय साइबर रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। सूरत साइबर क्राइम सेल की जांच में इस ठगी के तार पाकिस्तान से जुड़े मिले हैं।

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भारत

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Rahul Yadav

May 31, 2026

KBC Lottery Scam

KBC Lottery Scam (AI Image)

KBC Lottery Scam: आर्थिक संकट, महंगाई और विदेशी कर्ज के बोझ से जूझ रहे पाकिस्तान से कमाई का एक नया और खतरनाक 'डिजिटल मॉडल' सामने आया है। इस बार सीमा पार से हथियारों या घुसपैठ के जरिए नहीं, बल्कि फर्जी ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (केबीसी) के नाम पर भारतीयों को निशाना बनाया जा रहा है। सूरत साइबर क्राइम सेल ने एक ऐसे ही अंतरराज्यीय रैकेट का पर्दाफाश करते हुए असम से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनके तार सीधे पाकिस्तान से जुड़े हैं।

लॉटरी का झांसा देकर ऐंठे 13.51 लाख रुपए

यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब ठगों ने एक व्यक्ति को व्हाट्सएप कॉल के जरिए सूचना दी कि उसने केबीसी में 8.50 लाख रुपए और 25 लाख रुपए की लॉटरी जीती है। पीड़ित को रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग फीस, जीएसटी जैसे फर्जी बहानों से फंसाकर विभिन्न बैंक खातों में कुल 13 लाख 51 हजार 450 रुपए जमा करा दिए।

डीपफेक वीडियो और जाली दस्तावेजों का खेल

पीड़ित को पूरी तरह विश्वास में लेने के लिए शातिर ठगों ने अत्याधुनिक तकनीकों और जाली दस्तावेजों का सहारा लिया था। पीड़ित को अभिनेता अमिताभ बच्चन का एक डीपफेक वीडियो भेजा गया। साथ ही, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के लोगो वाले फर्जी लेटरहेड, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के नाम से नकली चेक और 100 रुपए के स्टाम्प पेपर पर भारत सरकार के 'मिनिस्ट्री ऑफ पावर' के लोगो वाले जाली डिजिटल दस्तावेज भी भेजे गए थे। जब लॉटरी की राशि नहीं मिली, तब पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर अपनी शिकायत दर्ज कराई।

डिजिटल जांच में सामने आया पाकिस्तानी कनेक्शन

डीसीपी साइबर बिशाखा जैन के मार्गदर्शन में जब पुलिस टीम ने तकनीकी जांच शुरू की, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पीड़ित को जिन नंबरों से व्हाट्सएप कॉल और मैसेज आ रहे थे, उनके आइपी एड्रेस पाकिस्तान के पाए गए। हालांकि, ठगी की इस रकम को भारत में मौजूद बैंक खातों के जरिए घुमाया जा रहा था। पुलिस ने डिजिटल फुटप्रिंट्स का पीछा करते हुए असम के नौगांव जिले के कोचगांव से दो आरोपियों को दबोच लिया। इनकी पहचान इजाजुल हक (24) और मुजफ्फर अली (27) के रूप में हुई है।

कमीशन पर काम करते थे आरोपी

जांच में पता चला कि गिरफ्तार आरोपी इस गिरोह में बतौर 'कमीशन एजेंट' काम कर रहे थे। इजाजुल हक ने अपने नाम से बैंक खाता खुलवाकर उसे कमीशन पर मुजफ्फर अली को दिया था, जिसने आगे इसे गिरोह के मुख्य सदस्यों को उपलब्ध कराया। इस काम के बदले कुल ट्रांजेक्शन पर मुजफ्फर को दो प्रतिशत और इजाजुल को एक प्रतिशत कमीशन मिलता था।