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केरल हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को कड़ी फटकार लगाते हुए सरकारी कर्मचारियों को व्यक्तिगत मैसेज भेजने से तत्काल रोक लगाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि तत्काल बंद करो कर्मचारियों को मैसेज भेजना, क्योंकि इससे निजता का उल्लंघन हो रहा है। यह फैसला एक सरकारी कर्मचारी द्वारा दायर याचिका पर आया, जिसमें आरोप लगाया गया कि CMO ने अवैध तरीके से कर्मचारियों के मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी हासिल कर बल्क मैसेज भेजे, जिसमें सरकार की उपलब्धियों का प्रचार किया गया।
याचिकाकर्ता, जो राज्य के जनरल एडमिनिस्ट्रेशन विभाग में तैनात हैं, ने बताया कि वे और कई कर्मचारी CMO से व्हाट्सएप पर अनचाहे मैसेज प्राप्त कर रहे थे। इन मैसेज में DA-DR वृद्धि और अन्य सरकारी योजनाओं की उपलब्धियां बताई जा रही थीं, जो 2026 विधानसभा चुनाव से पहले प्रचार जैसी लग रही थीं। याचिका में दावा किया गया कि ये नंबर SPARK (Service Payroll Administrative Repository for Kerala) पोर्टल से लिए गए, जो कर्मचारियों की सैलरी, HR और अन्य आधिकारिक जानकारी रखता है। कर्मचारियों ने कहा कि आधिकारिक उद्देश्य के लिए दिए गए डेटा का इस्तेमाल राजनीतिक प्रचार के लिए नहीं किया जा सकता, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निजता के अधिकार का उल्लंघन है।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान CMO से सवाल किया कि कर्मचारियों के व्यक्तिगत डेटा तक पहुंच कैसे बनी? कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि ऐसे मैसेज तुरंत बंद किए जाएं और अगली सुनवाई (शुक्रवार) तक कोई नया मैसेज नहीं भेजा जाए। कोर्ट ने सरकार से डेटा प्राप्ति के स्रोत, प्रक्रिया और निजता नियमों के पालन पर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है। यदि उल्लंघन साबित हुआ तो डेटा दुरुपयोग के लिए मुआवजे की मांग भी की गई है।
यह मामला केरल में काफी चर्चा में है, क्योंकि 2026 विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और CM पिनारायी विजयन की LDF सरकार पर विपक्ष आरोप लगा रहा है कि सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग चुनावी फायदे के लिए किया जा रहा है। कर्मचारी संगठनों ने भी इस पर आपत्ति जताई है, कहा है कि व्यक्तिगत नंबर आधिकारिक काम के लिए दिए जाते हैं, न कि प्रचार के लिए।
कोर्ट का यह हस्तक्षेप निजता और डेटा सुरक्षा के मुद्दे पर बड़ा संदेश है। अगली सुनवाई में सरकार का जवाब तय करेगा कि मामला कितना गंभीर है। फिलहाल CMO पर मैसेजिंग पर रोक लग चुकी है।
Published on:
24 Feb 2026 05:50 pm
