
Krishna Janmashtami 2021: नई दिल्ली। इस वर्ष जन्माष्टमी पर एक अत्यन्त दुर्लभ संयोग बन रहा है। भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस वर्ष जन्माष्टमी सोमवार को आ रही है, इसके साथ ही इस दिन रोहिणी नक्षत्र है और चन्द्रमा वृषभ राशि में है, शास्त्रों के अनुसार सोमवार या बुधवार को ऐसा योग बनना अपने आप में एक अत्यन्त दुर्लभ घटना है जो कई वर्षों में एक बार होती है।
ज्योतिषियों के अनुसार इस वर्ष जन्माष्टमी पर सुबह से लेकर रात दो बजे तक अष्टमी तिथि रहेगी, इसके बाद नवमी तिथि लग जाएगी। पूरे दिन चन्द्रमा वृषभ राशि में रहेगा। इन सबके अलावा इस दिन सर्वार्थसिद्धि योग भी है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जन्माष्टमी का व्रत समस्त पापों का नाश करने वाला माना गया है। यदि इस दिन भक्तजन व्रत करते हुए श्रीमद्भागवत तथा श्रीमद्भागवतगीता का पाठ करें तो उनके पूर्वजों की भी मुक्ति होती है और घर में सुख, समृद्धि का आगमन होता है।
जन्माष्टमी पर पूजा के लिए मुहूर्त
इस बार कृष्ण जन्माष्टमी पर पूजा के लिए शुभ मुहूर्त इस प्रकार है-
अष्टमी तिथि का आरंभ - 29 अगस्त, 2021 को 11.25 PM पर
अष्टमी तिथि का समापन - 31 अगस्त, 2021 को 01.59 AM पर
रोहिणी नक्षत्र का आरंभ - 30 अगस्त, 2021 को सुबह 06.39 पर
रोहिणी नक्षत्र का समापन - 31 अगस्त, 2021 को 9.44 AM फर
निशित पूजा का समय - रात्रि 11.59 से 12.44 AM तक
दही हांडी उत्सव - 31 अगस्त, 2021
जन्माष्टमी पर इस प्रकार करें व्रत
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर किए जाने वाले व्रत में एकादशी व्रत के समान समस्त नियमों का पालन किया जाना चाहिए। इस दिन पूरे समय अन्न ग्रहण नहीं किया जा सकता। रात्रि 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के बाद उनकी पूजा कर प्रसाद ग्रहण करना चाहिए। दिन भर भजन-कीर्तन करना चाहिए।
Updated on:
30 Aug 2021, 8:16 AM IST
Published on:
23 Aug 2021, 2:50 PM IST
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