27 जून 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

69 साल तक चला जमीन का मुकदमा, चार पीढ़ियां गुजर गईं, आखिर सुप्रीम कोर्ट से मिला इंसाफ

Supreme Court: हरिद्वार के नासिरपुर कलां की 15.5 बीघा जमीन को लेकर 1957 में शुरू हुआ विवाद 69 साल बाद सुप्रीम कोर्ट में समाप्त हुआ। चार पीढ़ियों तक चली कानूनी लड़ाई में शीर्ष अदालत ने निचली अदालतों और इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पलटते हुए सेल डीड को वैध ठहराया।
2 min read
Google source verification

भारत

image

Anurag Animesh

Jun 28, 2026

Supreme Court verdict

सुप्रीम कोर्ट(फोटो-ANI)

Supreme Court verdict after 69 Year: देश में अक्सर कहा जाता है कि अदालती विवाद, खासकर सिविल मामलों के फैसले आने में कई पीढ़ियां गुजर जाती हैं। हिमाचल प्रदेश से जुड़े एक जमीन विवाद ने इस कहावत को लगभग सच साबित कर दिया। यह मामला अलग-अलग न्यायिक स्तरों पर 69 वर्षों तक चलता रहा। इस दौरान परिवार की चार पीढ़ियां कानूनी लड़ाई लड़ती रहीं और आखिरकार उन्हें सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिला। यह विवाद हरिद्वार के पास स्थित नासिरपुर कलां गांव की 15.5 बीघा जमीन से जुड़ा था। इस मुकदमे की शुरुआत 4 जून 1957 को हुई, जब इस जमीन के संबंध में एक सेल डीड (बिक्री विलेख) तैयार की गई। उस समय नाबालिग अली के नाम पर उनके पिता शराफत अली ने यह जमीन खरीदी थी। इसी सेल डीड की वैधता को लेकर वर्षों तक कानूनी विवाद चलता रहा।

मुकदमे के दौरान समय के साथ परिवार की कई पीढ़ियां बदल गईं। पहले शराफत अली का निधन हुआ, फिर नाबालिग अली भी इस दुनिया में नहीं रहे। इसके बाद उनके उत्तराधिकारियों ने इस कानूनी लड़ाई को जारी रखा। आखिरकार चौथी पीढ़ी तक पहुंचते-पहुंचते इस संपत्ति विवाद का अंतिम फैसला आया।

जानें डिटेल्स


इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने की। उल्लेखनीय बात यह रही कि जब 1957 में इस मुकदमे की शुरुआत हुई थी, तब दोनों न्यायाधीशों का जन्म भी नहीं हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों और इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसलों को पलटते हुए 1957 की सेल डीड को वैध माना और अली के परिवार के पक्ष में फैसला सुनाया।

सात दशक बाद मिला न्याय


अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह विवाद समय के साथ कई प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं में उलझता चला गया। भूमि स्वामित्व में बदलाव के बाद सरकारी भूमि अभिलेखों को अपडेट करने की प्रक्रिया, उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन कानून के तहत हुई कार्रवाई और बाद में भूमि समेकन की प्रक्रिया के कारण मामला और जटिल होता गया।
निचली अदालतों, विभिन्न भूमि विवाद निपटान मंचों और इलाहाबाद हाईकोर्ट में हार के बावजूद अली के परिवार ने कानूनी लड़ाई जारी रखी। करीब सात दशक बाद सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ इस लंबे जमीन विवाद का अंत हुआ और परिवार को आखिरकार न्याय मिल गया।

बड़ी खबरें

View All

राष्ट्रीय

ट्रेंडिंग