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Hathras Stampede: ‘हाथरस’ से सबक: अब देश में उठने लगी धार्मिक आयोजनों के लिए कानून बनाने की मांग, इस बारे में क्या है कानून और क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

Hathras Tragedy: कोई ऐसा वैधानिक निकाय या प्राधिकरण नहीं है जो मेले और भीड़ वाले स्थलों के प्रबंधन की जिम्मेदारी उठा सके। यही वजह है कि इसको लेकर किसी भी राज्य की सरकार गंभीर नहीं है।

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Hathras Stampede

Hathras Stampede

No Rules for Religious gatherings in any states in India:पत्रिका टीम जयपुर/भोपाल/ रायपुर/ नई दिल्ली। राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ ही नहीं, देश के ज्यादातर राज्यों में कोई ऐसा सशक्त निकाय या प्राधिकरण नहीं है जो मेले और भीड़ वाले आयोजन स्थलों के प्रबंधन और विनियमन के लिए कार्य कर सके। इस कारण आयोजकों की कानूनी रूप से जिम्मेदारी तय नहीं हो पाती है। राजस्थान में मेहरानगढ़ दुखांतिका (Rajasthan Mehrangarh Tragedy) के बाद प्रभावी कानून बनाने की बात उठी। राजस्थान में पिछली सरकार ने मेहरानगढ़ दुखांतिका का हवाला देते हुए राजस्थान राज्य मेला प्राधिकरण विधेयक 2023 पारित भी कर दिया लेकिन उसे लागू नहीं किया जा सका। इस एक्ट के तहत मेलों के सुरक्षित आयोजन, प्रबंधन और विनियमन करने के लिए गठित मेला प्राधिकरण और जिला स्तरीय समितियों को सशक्त किया जाना था। एक्ट में आयोजकों को एक माह पहले अनुमति के लिए आवेदन करने और नियमों का उल्लंघन करने पर जिम्मेदारों को दंडित करने का भी प्रावधान था। ये लागू होता तो प्रवेश, निकास, पार्किंग, अग्नि सुरक्षा, जीवन सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध के बाद ही आयोजन किए जा सकेंगे। पिछली सरकार ने विधेयक पारित तो कर दिया लेकिन विरोध के कारण लागू करने से कदम पीछे खींच लिए। नई सरकार ने अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है।

नहीं बना अबतक कोई कानून

मध्य प्रदेश में भी भीड़ वाले आयोजन स्थलों पर हादसे रोकने के लिए पृथक से कोई कानून या वैधानिक प्राधिकरण नहीं है। अभी संबंधितजिला कलक्टर और एसपी को सुरक्षा व्यवस्था की योजना अमल में लानी होती है। छत्तीसगढ़ में भी मेले जैसे आयोजनों को व्यवस्थित करने के लिए कोई अलग से कानून या प्राधिकरण नहीं बना है। यहां लाखों की भीड़ एकत्र होती है

कब कब होती है मध्य प्रदेश के आयोजनों में भीड़

-उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में शिवरात्रि यात्रा के समय

-इंदौर के खजराना गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी पर-बागेश्वर धाम सहित कई जगह धर्म गुरु और कथा वाचकों के आयोजनों में

-दतिया के पीतांबरा मंदिर, आगर के नलखेड़ी मंदिर, रामराजा मंदिर, ओरछा-मैहर का शारदा मंदिर, सलकनपुर का माता मंदिर, देवास की माता टेकरी

राजस्थान में भी होते हैं कई बड़े धार्मिक आयोजन

-पुष्कर मेले में कार्तिक एकादशी से पूर्णिमा तक

-टोंक जिले में डिग्गी कल्याण पदयात्रा के समय मंदिर में-खाटूश्याम के फाल्गुनी मेले व रामदेवरा के भादवा मेले में

-अलवर में भगवान जगन्नाथ रथयात्रा और करणी माता के मेले में

-बेणेश्वर धाम: आदिवासियों के महाकुंभ में

-श्रीसांवलियांजी मंदिर में जलझूलनी एकादशी और जन्माष्टमी पर-त्रिनेत्र गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी पर, कैलादेवी मेला

-हनुमागढ़ में मां ब्रह्माणी मंदिर में नवरात्री मेले में-गोगामेड़ी में लोकदेवता जाहरवीर गोगाजी के मंदिर में मेले के समय

CG: इन धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं की जुटती है भीड़

-रायपुर के खारून नदी पर हटकेश्वर महादेव मंदिर में शिवरात्रि व पुन्नी मेले के समय

-गरियाबंद जिले के राजिम में माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक मेले में

-75 दिन तक बस्तर दशहरा लोकोत्सव में

-रायपुर में डब्लू आरएस व रावणभाठा मैदान में रावण दहन के समय

-राजनांदगांव: मंडीप खोल गुफा सैलानियों के लिए अक्षय तृतीया के 3 दिन बाद खुलती है। भीड़ एक ही नदी को 16 बार पार करके यहां तक पहुंचती है।

MP: कब कब हुए हृदय विदारक हादसे

-अक्टूबर 2013: दतिया के रतनगढ़ मंदिर में 117 लोगों की मौत

-15 जुलाई 1996: उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में 38 लोगों की मौत

-3 अक्टूबर 2006: दतिया के रतनगढ़ मंदिर जा रहे 50 श्रद्धालु नदी में बहे

-मार्च 2008: करीला मंदिर में भगदड़ में 6 की मौत, 11 घायल हुए

-अगस्त 2014: सतना के कामतानाथ मंदिर में भगदड़ में 10 लोगों की मौत

-मार्च 2023: इंदौर में धार्मिक आयोजन में स्लेब टूटने से 36 लोगों की मौत

Rajasthan : मेले में मची भगदड़ और बिछ गई थीं लाशें

-30 सितम्बर 2008: मेहरानगढ़ मंदिर में भगदड़ में 216 लोगों की मौत

-8 अगस्त 2022: खाटूश्यामजी मेले में भगदड़ में 3 लोगों की मौत

  • 2020: खाटूश्यामजी मेले में भगदड़ में 1 मौत
  • 2019: खाटूश्यामजी मेले में भगदड़ में 1 मौत

-1987-88 में अजमेर दरगाह में भगदड़ मचने पर 5 जायरीन की मौत

छत्तीसगढ़: यहां भी हुए कई हादसे, बड़े पैमाने में मरे लोग

डोगरगढ़ बम्लेश्वरी मंदिर में 2017 में आग लगने से सौ से ज्यादा दुकानें जल गईं।

  • 2022 में 10 दुकानों में आग लग गई।- रोपवे टूटने से मजदूर की मौत हो चुकी है।हर साल जमा होती है लाखों की भीड़, प्रबंधन राम भरोसे

कैसे हो इंतजाम जिनसे बचाई जा सके श्रद्धालुओं की जान

उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुई दुखांतिका में 121 मौतों के बाद भीड़ वाले आयोजन में सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। देश में हर साल कहीं न कहीं ऐसे हृदय विदारक हादसे होते हैं लेकिन, अब तक भीड़ प्रबंधन के लिए न कोई कड़ा कानून है और न ही कोई नियामक संस्था। राजस्थान में जरूर मेला प्राधिकरण बनाया गया, लेकिन इसके लिए कानून लागू नहीं हो पाया। अन्य राज्यों में तो ऐसी कोशिश भी नहीं की गई। अब भीड़ प्रबंधन के लिए कानून बनाने की मांग होने लगी है। पत्रिका ने एक्सपर्ट रमेश बोराणा, पूर्व उपाध्यक्ष, राजस्थान राज्य मेला प्राधिकरणसे जानना चाहा कि इंतजाम कैसे हों जिससे लोगों की जान सुरक्षित रखी जा सके और नीति निर्माताओं की नींद खुल सके।

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मेले में इस तरह के हों इंतजाम

-आयोजन स्थल पर आने-आने के लिए अलग-अलग रास्ते हों।
-कितने लोग आयोजन में आएंगे, इसका पूर्व में आंकलन होना चाहिए।

  • पेयजल व्यवस्था अच्छी हो ताकि धक्का-मुक्की नहीं हो।
  • यदि बड़ी मात्रा में भोजन बन रहा हो तो उसकी जांच होनी चाहिए।
  • लोगों को सपोर्ट करने वाले व्यावहारिक लोगों की ड्यूटी आयोजन स्थल पर लगानी चाहिए।
  • अफवाहों को रोकने के लिए संचार सिस्टम होना चाहिए।
  • भीड़ वाले आयोजनों के प्रबंधन और विनियमनय के लिए राष्ट्रीय कानून होना चाहिए।