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जैसे कोई गुंडा मुख्यमंत्री के घर में… विभव कुमार के लिए जमानत मांगने पर सुप्रीम कोर्ट ने देश के बड़े वकील को लगाई फटकार

New Delhi: गुरुवार को बिभव का पक्ष रखते हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कोई उनके (स्वाती मालीवाल) पास नहीं गया था, बल्कि वो CM हाउस आ गईं थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप तो ऐसा कह रहे हैं, जैसे कोई गुंडा घुस गया हो।

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दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष और आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाती मालीवाल के साथ मुख्यमंत्री आवास पर हुई मारपीट के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने काफी तीखी टिप्पणी की है। गुरुवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निजी सहायक बिभव कुमार की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की बेंच ने बेहद सख्त रवैया अपनाते हुए दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर बिभव की जमानत अर्जी पर जवाब मांगा। इसके साथ ही कोर्ट ने बिभव कुमार की तरफ से दलील रख रहे देश के बड़े वकील अभिषेक मनु सिंघवी को भी फटकार लगा दी। अब इस मामले में अगली सुनवाई सात अगस्त को होगी।

जैसे कोई गुंडा मुख्यमंत्री के आवास में…

दरअसल, गुरुवार को बिभव का पक्ष रखते हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कोई उनके (स्वाती मालीवाल) पास नहीं गया था, बल्कि वो CM हाउस आ गईं थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप तो ऐसा कह रहे हैं, जैसे कोई गुंडा घुस गया हो। बिभव कुमार ने स्वाति मालीवाल द्वारा सेहत के संबंध में बताए जाने के बावजूद उनके साथ मारपीट की। बिभव कुमार ने इस तरह आचरण किया जैसे कोई गुंडा मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास में घुस गया हो। ‘क्या मुख्यमंत्री आवास निजी बंगला है? कोर्ट ने बिभव कुमार के वकील से पूछा कि क्या इस तरह के ‘गुंडे’ को मुख्यमंत्री आवास में काम करना चाहिए।’

अगर मालीवाल ने 112 पर कॉल किया को आपका दावा झूठा

सुप्रीम कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल के सहायक बिभव कुमार के वकील सिंघवी से कहा कि मारपीट की घटना के दौरान राज्यसभा सदस्य स्वाति मालीवाल द्वारा पुलिस हेल्पलाइन पर फोन करने से क्या संकेत मिलता है। वहीं वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने बिभव की पैरवी करते हुए कहा कि एफआईआर तीन दिन बाद दर्ज कराई गई। पहले तो स्वाति मालीवाल थाने गईं लेकिन बिना एफआईआर दर्ज कराए लौट गईं। इस पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा कि क्या मालीवाल ने 112 पर कॉल किया? अगर हां तो यह आपके दावे को झूठा साबित करता है कि उसने मनगढ़ंत कहानी गढ़ी।

क्या सीएम का सरकारी घर निजी आवास है?

वकील सिंघवी ने माना कि वो सीएम आवास गईं थी। इस पर जस्टिस सूर्यकांतकांत ने पूछा कि क्या सीएम का सरकारी घर निजी आवास है? क्या इसके लिए इस तरह के नियमों की जरूरत है? सिंघवी ने कहा कि कुमार के खिलाफ पांच आरोप हैं। उन्होंने तर्क दिया कि ” जो एमएलसी रिपोर्ट दायर नहीं की जा सकी, उसमें कहा गया है कि स्वाति को लगी चोटें खतरनाक नहीं, साधारण हैं। दो चोटें हैं, एक दाहिने गाल पर, एक बाएं पैर पर। यह उनके आरोपों के बिल्कुल विपरीत है।” इस सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम हैरान हैं, यह मामूली या बड़ी चोटों के बारे में नहीं है। हाईकोर्ट ने हर बात को सही तरीके से सुना है। उनको शर्म नहीं आई। ⁠वह एक महिला हैं। ⁠हम कॉन्ट्रैक्ट किलर, हत्यारों को भी जमानत देते हैं। ⁠लेकिन इस मामले में किस तरह की नैतिक दृढ़ता है?

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