3 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Lok Sabha Election 2024 : भाजपा कमल खिलाने के जतन में, राहुल का मुकाबला गठबंधन के दल से ही, केरल में ‘इंडिया’ गठबंधन के दल आपस में ठोक रहे ताल

Lok Sabha Election 2024 : यूं तो पूरे देश में भाजपा को रोकने के लिए कांग्रेस और वामपंथी दल एक उम्मीदवार उतारने की रणनीति बना रहे हैं, लेकिन केरल में बात कुछ अलग है। यहां दोनों दल एक दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहाते। दोनों दल एक दूसरे के खिलाफ शिद्दत से चुनाव लडऩे के लिए कमर कस रहे हैं। पढ़िए अनंत मिश्रा की विशेष रिपोर्ट...

4 min read
Google source verification
lok_sabha_election_2024__kerala.jpg

Lok Sabha Election 2024 : तमिलनाडु के बाद रुख किया केरल की तरफ। नागरकोइल से तिरुनेलवेली-जामनगर एक्सप्रेस पकड़कर अल्लापुझ्झा के लिए रवाना हुआ। ट्रेन में सवार हुआ तो ध्यान द्रविड़ राजनीति से हटकर मलयालम राजनीति पर टिक गया। ट्रेन की बर्थ पर लेटे-लेटे ख्याल आ रहा था कि पिछले पांच सालों में कितनी बदली होगी केरल की जमीनी राजनीति? कांग्रेस और वामपंथी दलों के बीच हिंसक संघर्ष का साक्षी रहा केरल क्या इस बार भी 'हाथ' और 'हांसिया हथोड़ा' के संघर्ष में ही उलझकर रह जाएगा? या फिर इस तटीय प्रदेश में 'कमल' को खिलने का भी मौका मिलेगा? ये सवाल इसलिए सामने आया क्योंकि पिछले लोकसभा चुनाव में तमिलनाडु की तरह तमाम दावों के बावजूद भाजपा केरल में भी खाता नहीं खोल पाई थी। नागरकोइल से चली ट्रेन आधा घंटे में कॉफी, रबर, नारियल उत्पादन के लिए पहचाने जाने वाले केरल में प्रवेश कर गई। ट्रेन में यात्री उतरते-चढ़ते रहे। सोचा क्यों ना बातचीत का सिलसिला शुरू किया जाए। सामने सीट पर बैठे कोल्लम निवासी एस. बालाकृष्णन से परिचय बढ़ाना चाहा। काजू और मसालों के व्यवसाय से जुड़े बालाकृष्णन अपने मोबाइल में व्यस्त थे।

बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ तो उनसे केरल की राजनीति के समीकरणों को समझना चाहा। राजनीति में अधिक रुचि नहीं रखने वाले बालाकृष्णन ने अपनी जानकारी के हिसाब से बताया कि मुकाबला इस बार भी कांग्रेस और वामपंथी दलों के बीच ही रहने वाला है। क्या भाजपा को जगह मिलेगी, सवाल पूछा तो बोले- एकाध सीट के अलावा कोई खास चांस नहीं। ट्रेन तिरुवंतपुरम रुकी तो कई यात्री चढ़े। इनमें से पप्पनमकोडे में रहने वाली शिक्षिका धनलक्ष्मी गणेश भी शामिल थी। बातचीत से लगा कि उनकी हिंदी अच्छी है और राजनीति में रुचि भी। सवाल करने से पहले ही बोल उठीं, इस बार हमारे शहर में मुकाबला रोचक होने वाला है। कांग्रेस के दिग्गज शशि थरूर के सामने भाजपा ने केन्द्रीय मंत्री राजीव चंद्रेशखर को उतारा है। पूछा, किसके चांस ज्यादा लग रहे हैं, जवाब- अभी कहना जल्दबाजी होगा, लेकिन कोई भी निकल सकता है। बातचीत का सिलसिला होते-होते मेरा गंतव्य अल्लापुझ्झा आ गया। ये वही शहर है जहां चार साल पहले भारत में कोरोना का पहला मामला सामने आया था।

कांग्रेस ने पार्टी के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल को यहां से उतारा है। पिछले चुनाव में माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के ए.एम. आरिफ यहां से विजयी हुए थे। वेणुगोपाल का यहां भाकपा प्रत्याशी से मुकाबला होगा। यूं तो पूरे देश में भाजपा को रोकने के लिए कांग्रेस और वामपंथी दल एक उम्मीदवार उतारने की रणनीति बना रहे हैं, लेकिन केरल में बात कुछ अलग है। यहां दोनों दल एक दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहाते। दोनों दल एक दूसरे के खिलाफ शिद्दत से चुनाव लडऩे के लिए कमर कस रहे हैं। 20 सीटों के लिए होने जा रहे संघर्ष में इस बार भाजपा भी अपना खाता खोलने की तैयारी में जुटी है। यहां धर्मान्तरण भी चुनावी मुद्दा है तो भ्रष्टाचार भी बड़ा मुद्दा है। दूसरे तटीय राज्यों की तरह मछुआरों की समस्याएं भी चर्चा के केन्द्र में है। सबसे अधिक शिक्षित इस राज्य में दूसरे राज्यों की तरह बेरोजगारी की चर्चा आम नहीं है।

त्रिकोणीय संघर्ष का केन्द्र बनेगा
राज्य दो दिन के प्रवास के दौरान लोगों से हुई बातचीत का सार यही निकलता है कि राज्य इस बार त्रिकोणीय संघर्ष का केन्द्र बनने जा रहा है। पहली पायदान पर कांग्रेस नजर आ रही हैं। वामपंथी मोर्चे की ताकत बढऩे की पूरी संभावना दिख रही है तो एकाध सीट पर 'भगवा' लहर बन जाए तो आश्चर्य नहीं होगा।

वायनाड: राहुल के मुकाबले राजा
दिल्ली का रास्ता आसान बनाने की जुगत में जुटा 'इंडिया' गठबंधन केरल में कभी एक मंच पर आ नहीं पाया। हालत यह है कि राहुल गांधी की वायनाड सीट पर भाकपा ने एन्नी राजा को उतार मुकाबला रोचक बना दिया है। एन्नी पार्टी महासचिव डी. राजा की पत्नी और पार्टी की पदाधिकारी हैं। यहां 'इंडिया' गठबंधन के दल हर सीट पर एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोक रहे हैं। कांग्रेस और वामपंथी दलों को पता है कि यहां वे एक होकर लड़े तो इसका फायदा भाजपा को मिलना तय है।

थरूर के मुकाबले चंद्रशेखर
पद्मनाभस्वामी मंदिर के शहर तिरुवनंतपुरम में पिछले तीन बार से इस सीट पर जीत रहे कांग्रेस के शशि थरूर के सामने भाजपा ने केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर को उतार मुकाबला रोचक बना दिया है। 2014 में थरूर भाजपा के खिलाफ कड़े मुकाबले में जीत पाए थे।

फिल्मी सितारों और चर्च का सहारा
राज्य में तीसरी ताकत बनने के प्रयास में जुटी भाजपा चर्च से नजदीकियां बढ़ाकर वोट बैंक मजबूत करना चाह रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पादरियों से मुलाकात कर रहे हैं। पार्टी ने त्रिशूर सीट पर मलयालम अभिनेता सुरेश गोपी को उतारा है। कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे ए.के. एंटनी के पुत्र अनिल एंटनी को पथानामथिट्टा सीट से उतारकर कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री के. करूणाकरण की पुत्री पद्मजा वेणुगोपाल को पार्टी में शामिल करना भी भाजपा की सेंधमारी राजनीति का हिस्सा है।


लोकसभा चुनाव 2019
किस दल को कितनी सीटें मिली
कुल सीट - 20
सीपीआईएम - 1 सीट
कांग्रेस - 15 सीट
आईयूएमएल - 2 सीट
केरला कांग्रेस एम - 1 सीट
आरएसपी - 1 सीट

किस दल को कितने मत मिले
कम्‍युनिस्‍ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी)- 25.97 प्रतिशत
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग - 5.48 प्रतिशत
केरला कांग्रेस एम - 2.08 प्रतिशत
आरएसपी - 2.46 प्रतिशत

यह भी पढ़ें- Lok Sabha Elections 2024: सुबह दिया इस्तीफा... दोपहर को कांग्रेस में शामिल, लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी को बड़ा झटका

यह भी पढ़ें- अगर पति मोदी-मोदी के नारे लगाए तो रात में न दें खाना: केजरीवाल की महिला वोटरों से अपील