
लोकसभा चुनाव के पहले चरण में 19 अप्रैल को महाराष्ट्र की पांच सीटों पर मतदान होगा। पहले चरण में नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली समेत पूर्वी विदर्भ के पांच निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान होगा। जिसको लेकर सुरक्षा के कड़े इंतेजाम किए गए हैं। सभी मतदान केंद्रों पर सुरक्षाबलों की भारी तैनाती की गई है। संवेदनशील बूथों पर सेना के हेलीकॉप्टर से 295 मतदान कर्मियों को पहुंचाया गया है।
महाराष्ट्र में पहले चरण में विदर्भ के पांच लोकसभा सीट- रामटेक, नागपुर, भंडारा-गोंडिया, गढ़चिरौली-चिमूर और चंद्रपुर में मतदान होगा। इन पांच निर्वाचन क्षेत्रों में 95,54,667 मतदाता 10,652 मतदान केंद्रों में अपना वोट डालेंगे।
गढ़चिरौली पुलिस अधीक्षक (एसपी) नीलोत्पल ने कहा, "हमने पिछले 6 महीनों में काफी व्यापक तैयारी की है। शुक्रवार को मतदान के लिए कुल 206 बूथ हैं। 15,000 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जाएगी। भारतीय वायुसेना के 6 एमआई-17 हेलीकॉप्टर मुस्तैद है। इसके अलावा हमारे पास 130 ड्रोन का बेड़ा है जो आसमान से नजर रखेगा।
एसपी नीलोत्पल ने कहा, “संवेदनशील और अति संवेदनशील इलाकों में ईवीएम और पोलिंग पार्टियों को पहले ही ‘हेली ड्रॉप’ कर दिया गया है। हमने ग्रामीणों से अपील की है कि वे बिना किसी डर के बाहर आएं और मतदान करें... इस चुनाव को शांतिपूर्ण और सफल बनाने में हमारी मदद करें।“
पहले चरण में जिन उम्मीदवारों के राजनीतिक भाग्य का फैसला होगा, उसमें सबसे बड़ा नाम केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का है। इसके अलावा, प्रतिभा धानोरकर (कांग्रेस) और सुधीर मुनगंटीवार (बीजेपी) पर भी सबकी नजर टिकी है।
इस बार पूर्वी विदर्भ की पांच लोकसभा सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला होने की संभावना है। राज्य निर्वाचन विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, 97 प्रतियोगी मैदान में हैं, लेकिन इन पांच निर्वाचन क्षेत्रों में कांग्रेस, बीजेपी, शिवसेना और बसपा सहित मान्यता प्राप्त दलों के उम्मीदवारों के बीच मुकाबले की उम्मीद है।
2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आए मध्य भारत के नक्सल प्रभावित क्षेत्र और बाघों के गढ़ गढ़चिरौली-चिमूर लोकसभा सीट एसटी श्रेणी के लिए आरक्षित है। इस निर्वाचन क्षेत्र में यह चौथा लोकसभा चुनाव होने जा रहा है। नई गढ़चिरौली-चिमूर (एसटी) सीट पर 2009 में पहली बार लोकसभा चुनाव हुआ था। तब तीन बार के पूर्व विधायक और राज्य सरकार में मंत्री रहे कांग्रेस के मारोत्राव कावासे भारी अंतर से चुने गए थे। लेकिन 2014 में मोदी लहर ने सब कुछ बदल दिया। कावासे को बीजेपी के अशोक नेते ने हरा दिया। नेते ने 2019 में भी आसानी से यह उपलब्धि दोहराई और अब तीसरी बार जीत का लक्ष्य लेकर चुनावी अखाड़े में उतरे हैं।
इस बार बीजेपी सांसद अशोक नेते का मुकाबला महाविकास अघाड़ी-इंडिया ब्लॉक के कांग्रेस उम्मीदवार नामदेव क्रिसन और प्रकाश अंबेडकर के नेतृत्व वाली वंचित बहुजन अघाड़ी (वीबीए) के हितेश मडावी के अलावा अखिल भारतीय भीम सेना (एबीबीएस) से है।
Updated on:
18 Apr 2024 08:23 pm
Published on:
18 Apr 2024 08:15 pm
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