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IMD Weather Alert: बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर सक्रिय, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

इस साल बारिश के लिए किसान तरस गए हैं। सामान्य कि तुलना में काफी कम बारिश हुई है। मौसम विभाग ने बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर सक्रिय होने की वजह से अलर्ट जारी किया है। पढ़ें पूरी खबर...
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Chhattisgarh Rain Update

झमाझम बारिश से बदला मौसम (photo source- Patrika)

देशभर में मानसून का विस्तार पूरा होने के बावजूद जुलाई के मध्य तक कई राज्यों में बारिश का लंबा ब्रेक किसानों और आमजन की चिंता बढ़ा रहा है। सामान्यत: जुलाई मानसून का सबसे अधिक वर्षा वाला महीना माना जाता है, लेकिन इस बार आधा महीना बीतने के बाद भी उत्तर-पश्चिम व मध्य भारत के अधिकांश हिस्सों में बारिश सामान्य से काफी कम रही है। इसका असर खरीफ फसलों की बुवाई, जलाशयों के जलस्तर और पेयजल-ङ्क्षसचाई व्यवस्था पर पडऩे की आशंका बढ़ गई है।

मौसम विज्ञान विभाग (आइएमडी) के अनुसार इस बार 1 जून से 17 जुलाई तक देश में मानसूनी वर्षा सामान्य से 24 प्रतिशत कम दर्ज की गई है। सामान्य 313.9 मिमी की तुलना में 238 मिमी बारिश ही हुई है। कई राज्यों में मानसून की सक्रियता कमजोर बनी हुई है। आइएमडी का अनुमान है कि पूरे जुलाई में भी वर्षा सामान्य से कम, यानी दीर्घकालिक औसत (एलपीए) का करीब 94 प्रतिशत रह सकती है। हालांकि राहत की बात यह है कि जुलाई के अंतिम सप्ताह में बारिश का दौर फिर तेज होने की उम्मीद है।

जलाशयों के हालात फिलहाल बेहतर

केंद्रीय जल आयोग के अनुसार देश के 166 प्रमुख जलाशयों में 59.443 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) पानी उपलब्ध है, जो कुल लाइव स्टोरेज क्षमता का 32.38 प्रतिशत है। यह भंडारण सामान्य स्तर से 7.62 प्रतिशत अधिक है। सबसे अधिक जल भंडारण मध्यप्रदेश (12.023 बीसीएम), महाराष्ट्र (9.153 बीसीएम) और ओडिशा (8.743 बीसीएम) में दर्ज किया गया है।

बुवाई 16 प्रतिशत पीछे

बारिश की कमी का असर खरीफ फसलों की बुवाई पर दिखाई दे रहा है। कृषि मंत्रालय के अनुसार 10 जुलाई तक देश में 531.25 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 632.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हो चुकी थी। यानी इस बार बुवाई 101.44 लाख हेक्टेयर (16.03 प्रतिशत) कम है। सामान्य औसत की तुलना में भी बुवाई 18.11 लाख हेक्टेयर पीछे है। धान की बुवाई 10.84 लाख हेक्टेयर और दलहन की 17.22 लाख हेक्टेयर कम हुई है। अगले एक-दो सप्ताह में अच्छी बारिश नहीं हुई तो इसका असर उत्पादन पर भी पड़ सकता है।

लो प्रेशर से बढ़ेगी बारिश

बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव का क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) अब मानसून को गति दे सकता है। इसके प्रभाव से उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश शुरू हो गई है। अगले सात दिनों में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर के राज्यों में कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। दिल्ली-एनसीआर व राजस्थान के कुछ हिस्सों में भी हल्की से मध्यम बारिश की उम्मीद हैं। 20 से 30 जुलाई के बीच मध्य भारत और उत्तर भारत के बड़े हिस्से में मानसून फिर सक्रिय हो सकता है।

सूर्य के आगे शुक्र स्थिति से उत्तम वर्षा के योग

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस वर्ष सावन और भादौ में देश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश के संकेत हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला के अनुसार मेदिनी ज्योतिष में ग्रहों की वर्तमान स्थिति, अधिकतर ग्रहों का जलनाड़ी में होना और सूर्य के आगे शुक्र की स्थिति उत्तम वर्षा के योग बना रही है। 1 अगस्त को शुक्र के कन्या राशि में प्रवेश, 2 अगस्त को मंगल के मिथुन राशि में आने और 3 अगस्त को सूर्य के अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश से वर्षा के योग और मजबूत होंगे। वहीं 11 अगस्त को गुरु तारा उदित होने तथा शुक्र के हस्त नक्षत्र में प्रवेश से देशभर में व्यापक वर्षा के संकेत हैं। कुछ क्षेत्रों में अतिवृष्टि और बाढ़ की स्थिति भी बन सकती है।

17 जुलाई तक बारिश का सामान्य औसत- 313.9 मिमी
इस साल अब तक हुई बारिश--238 मिमी

खरीफ बुवाई-(10 जुलाई तक)
पिछले साल बुवाई- 632.69 लाख हेक्टेयर
इस बार बुवाई- 531.25 लाख हेक्टेयर
अब तक कमी- 101.44 लाख हेक्टेयर (16.03 प्रतिशत कम )

166 प्रमुख जलाशयों में पानी-
कुल लाइव स्टोरज क्षमता-183.565
उपलब्ध पानी- 59.443 बीसीएम (32.38% )
पिछले साल की तुलना में पानी - 63.52%
सामान्य जल स्तर की तुलना में पानी- 7.62% अधिक

टॉप जल स्टोरेज वाले राज्य-
मध्य प्रदेश (12.023 बीसीएम)
महाराष्ट्र (9.153 बीसीएम)
ओडिशा (8.743 बीसीएम)

सबसे कम जल भंडारण (राज्य व बचा पानी प्रतिशत)-
तेलंगाना (12.92%)
पश्चिम बंगाल (15.24%)
उत्तराखंड (20.23%)