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मुंबई को डूबने से बचाने के लिए गठित हुआ स्टेट क्लाइमेट चेंज काउंसिल, सीएम उद्धव ठाकरे बने अध्यक्ष

जलवायु परिवर्तन (climate change) के असर से मुंबई को पानी-पानी होने से बचाने और बढ़ती वज्रपात की घटनाओं को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने अहम फैसला लिया है। दरअसल, राज्य सरकार ने स्टेट क्लाइमेट चेंज काउंसिल (State Climate Change Council) का गठन किया है।

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सीएम उद्धव ठाकरे

सीएम उद्धव ठाकरे

नई दिल्ली। जलवायु परिवर्तन (climate change) के असर से मुंबई को पानी-पानी होने से बचाने और बढ़ती वज्रपात की घटनाओं को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने अहम फैसला लिया है। दरअसल, राज्य सरकार ने स्टेट क्लाइमेट चेंज काउंसिल (State Climate Change Council) का गठन किया है। वहीं मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (cm uddhav thackeray) को इस काउंसिल के अध्यक्ष बनाए गए हैं। अब राज्य सरकार ने संयुक्त राष्ट्र की तरफ से घोषित 5 आर (रिडूज्स, रिफ्यूज, रियूज, रिसाइकिल, रिकवर) के अनुसार राज्य में कार्रवाई करेगी।

बीएमसी आयुक्त ने किया अगाह

दरअसल, बीते सप्ताह बीएमसी (BMC) आयुक्त इकबाल सिंह चहल ने जलवायु परिवर्तन (climate change) से मुंबई (mumbai) पर गंभीर प्रभाव और इससे होने वाले खतरे को लेकर चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा कि अगर इस दिशा में काम नहीं किया गया तो हालात भयावय हो सकते हैं। बीएमसी (bmc) आयुक्त ने कहा हालात 'ऐसे ही रहे तो साल 2050 तक दक्षिण मुंबई का 70 फीसदी हिस्सा पानी-पानी हो जाएगा।'

स्टेट क्लाइमेट चेंज काउंसिल का गठन

इस विषय पर 1 सितंबर को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक हुई, जिसमें पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन विभाग ने यह रिपोर्ट पेश कर जलवायु परिवर्तन (climate change) से महाराष्ट्र (maharashtra) पर होने वाले असर होने की जानकारी दी। इसके बाद स्टेट क्लाइमेट चेंज काउंसिल (State Climate Change Council) के गठन का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।

मुंबई में साइक्लोन का खतरा

गौरतलब है कि पिछले मुंबई में पिछले 15 महीनों में तीन बार साइक्लोन (Cyclone) का चुका है। इस पर चिंता जताते हुए चहल ने कहा कि साल 1891 के बाद 30 जून 2020 को पहली बार मुंबई में निसर्ग तूफान आया था, जिससे काफी नुकसान हुआ था। उसके बाद मुंबई दो और साइक्लोन (Cyclone in mumbai) का सामना कर चुकी है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जलवायु परिवर्तन का मुंबई पर कितना बुरा असर पड़ रहा है

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रिपोर्ट में कहा गया कि मौसम में 2 से 2.5 अंश डिग्री तापमान बढ़ने से राज्य के तटीय इलाके पानी में डूब सकते हैं। वहीं मध्य महाराष्ट्र में भीषण सूखा और जंगलों को नुकसान पहुंच सकता है। इसके साथ ही रिपोर्ट में भारत के 12 तटीय शहरों के पानी में डूबने की आशंका प्रकट की गई है। इसके अलावा शहरी प्रभावित द्वीप प्रभाव, भूस्खलन के भी परिणाम हो सकते हैं।

इस दिशा में काम करेगी सरकार

इसके चलते जलवायु परिवर्तन (climate change) के परिणामों की गंभीरता को कम करने के लिए राज्य सरकार ने संयुक्त राष्ट्र की तरफ से घोषित 5 आर (रिडूज्स, रिफ्यूज, रियूज, रिसाइकिल, रिकवर) के अनुसार राज्य में कार्रवाई करेगी। गौरतलब है कि महाराष्ट्र एक उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र है।