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‘SHO खुद अपना नंबर दें’, दिल्ली HC का आदेश- पीड़ित परिवार को मिले सख्त सुरक्षा, सोशल मीडिया से 250 वीडियो हटाए गए

Delhi High Court : दिल्ली हाई कोर्ट ने उत्तम नगर मर्डर केस के पीड़ित परिवार को कड़ी सुरक्षा देने का आदेश दिया है। अब तक 250 भड़काऊ वीडियो हटाए जा चुके हैं।

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Uttam Nagar Holi Murder

मृतक के परिवार को दिल्ली पुलिस देगी सुरक्षा

Tarun Murder Case: दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में होली के दौरान 26 वर्षीय तरुण की हत्या के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने पीड़ित परिवार की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। जस्टिस गिरीश कठपालिया ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि परिवार की सुरक्षा में कोई चूक नहीं होनी चाहिए। साथ ही, इलाके में सांप्रदायिक तनाव भड़काने वाले डिजिटल कंटेंट पर भी कड़ा प्रहार किया गया है।

SHO को खुद देना होगा मोबाइल नंबर

अदालत ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की उन दलीलों पर गौर किया, जिसमें बताया गया कि परिवार की सुरक्षा के लिए घर के बाहर पुलिस पिकेट (चौकी) तैनात कर दी गई है और पूरे इलाके में CCTV कैमरे लगाए गए हैं। कोर्ट ने आगे निर्देश दिया कि संबंधित इलाके के SHO (थाना प्रभारी) अपना निजी मोबाइल नंबर परिवार के साथ साझा करें, ताकि किसी भी आपात स्थिति या धमकी की सूरत में वे सीधे संपर्क कर सकें।

सोशल मीडिया पर 'डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक'

इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही नफरत पर भी कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि अब तक सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील और भड़काऊ लगभग 250 से ज्यादा वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटा दिए गए हैं। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को छूट दी है कि यदि वे ऐसा कोई और कंटेंट देखते हैं, तो उसे तुरंत पुलिस को रिपोर्ट करें ताकि उसे भी हटाया जा सके।

गुब्बारे की बात पर हुई थी तरुण की हत्या

यह पूरा मामला 4 मार्च 2026 (होली) का है। तरुण की मां लक्ष्मी देवी द्वारा दायर याचिका के अनुसार, एक बच्चे द्वारा गुब्बारा फेंकने जैसी मामूली बात पर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ा कि उसने हिंसक झड़प का रूप ले लिया। इसी हिंसा में तरुण की जान चली गई थी। इस मामले में पुलिस ने 22 आरोपियों की पहचान की है, जिनमें से 18 को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य अब भी फरार हैं।

गवाहों को धमकाने का आरोप

पीड़ित परिवार, जो इस केस में मुख्य गवाह भी है, ने आरोप लगाया है कि फरार आरोपियों और उनके साथियों द्वारा उन्हें लगातार धमकाया जा रहा है। याचिका में 13 अप्रैल की एक घटना का जिक्र किया गया, जहां कुछ महिलाओं ने कथित तौर पर घर आकर परिवार को केस वापस लेने की धमकी दी थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ACP रैंक के अधिकारी इस मामले की जांच कर रहे हैं और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

SC/ST एक्ट के तहत दर्ज है मामला

बता दें कि इस मामले में उत्तम नगर थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत FIR दर्ज है। वरिष्ठ अधिवक्ता प्रमोद कुमार दुबे ने याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखा।