
विक्रमजीत सहनी (फोटो-ANI)
राघव चड्ढा, संदीप पाठक, स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह समेत सात बड़े सांसद एक झटके में AAP छोड़कर BJP में चले गए। यह सिर्फ पार्टी छोड़ना नहीं था, यह उस गुस्से का विस्फोट था जो अंदर ही अंदर सालों से धधक रहा था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अरविंद केजरीवाल को यह सब पहले से पता था।
राज्यसभा सांसद विक्रमजीत साहनी ने NDTV को बताया कि वे बुधवार को खुद केजरीवाल से मिले थे और उन्हें साफ शब्दों में समझाया था कि हालात कहां जा रहे हैं। साहनी ने कहा कि उन्होंने केजरीवाल को चेताया था कि अगर एक-दो सांसद भी राज्यसभा से इस्तीफा देते हैं तो बाकी पांच सांसदों के साथ दो-तिहाई का आंकड़ा पूरा हो जाएगा। यह वही आंकड़ा है जो दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए जरूरी होता है। साहनी के मुताबिक केजरीवाल संदीप पाठक के इस्तीफे को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं थे। यानी केजरीवाल को चेतावनी मिली, लेकिन शायद उस पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया।
साहनी ने PTI को बताया कि 2022 के पंजाब चुनावों में राघव चड्ढा और संदीप पाठक ने टिकट बंटवारे से लेकर पूरी चुनावी रणनीति तक में अहम भूमिका निभाई थी। उस ऐतिहासिक जीत के बाद भी इन दोनों को धीरे-धीरे किनारे कर दिया गया। 2025 के दिल्ली चुनाव में हार के बाद पार्टी की कमान एक नई टीम के हाथ में आ गई और चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उप-नेता पद से भी हटा दिया गया।
साहनी ने साफ कहा कि यही वह मोड़ था जहां से निराशा फैलनी शुरू हुई। इन दोनों बड़े नेताओं ने बाकी सांसदों से बात की और धीरे-धीरे सबके मन में यह बात घर कर गई कि पंजाब की सेवा इस तरह नहीं हो सकती।
जाने वाले सांसदों पर AAP नेताओं ने जमकर निशाना साधा। उन्हें गद्दार कहा गया और पंजाब की जनता से विश्वासघात का आरोप लगाया गया। लेकिन चड्ढा ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें हमेशा लगता था कि वे गलत पार्टी में सही इंसान हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने पार्टी इसलिए छोड़ी क्योंकि वे केजरीवाल के अपराधों का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे।
साहनी ने AAP के धोखे वाले आरोप को सिरे से नकारते हुए कहा कि किसी ने भी पंजाब या पंजाब की जनता के साथ धोखा नहीं किया है। उन्होंने कहा कि पंजाब को मजबूत केंद्रीय समर्थन की जरूरत है और जरूरत पड़ी तो वे इस्तीफा देने को भी तैयार हैं।
साहनी ने यह भी साफ कर दिया कि अगर मामला उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति या सुप्रीम कोर्ट तक भी जाए तो वे पीछे नहीं हटेंगे। उनके मुताबिक दो-तिहाई बहुमत और विलय के नियम उनके पक्ष में हैं। AAP और केजरीवाल ने अभी तक साहनी के किसी भी दावे पर कोई जवाब नहीं दिया है।
Updated on:
26 Apr 2026 05:59 pm
Published on:
26 Apr 2026 05:59 pm
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