
अरविंद केजरीवाल को मिला नया घर
Kejriwal Moves To New Bungalow: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अब राजधानी के पॉश इलाके लोधी एस्टेट में रहेंगे। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद वह काफी समय से राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल के घर में रह रहे थे। शुक्रवार को उन्होंने स्वयं सोशल मीडिया के जरिए नए घर में शिफ्ट होने की जानकारी साझा की और बताया कि यह बंगला उन्हें कानूनी प्रक्रिया के बाद मिला है।
आपको बता दें कि अरविंद केजरीवाल को आवंटित ‘95, लोधी एस्टेट’ बंगला टाइप-7 श्रेणी का बेहद भव्य सरकारी आवास है, जो आमतौर पर केंद्र सरकार के मंत्रियों या अत्यंत विशिष्ट (VVIP) हस्तियों को ही दिया जाता है। करीब 5000 स्क्वॉयर फीट में फैले इस बंगले में 4 बड़े बेडरूम, एक ऑफिस स्पेस, 2 बड़े लॉन, 3 सर्वेंट क्वॉर्टर और एक गैराज जैसी सुविधाएं मौजूद हैं।
नियमों के मुताबिक, देश की सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय पार्टियों के अध्यक्षों को दिल्ली में आवास आवंटित किया जाता है। चूंकि 'आप' एक राष्ट्रीय पार्टी है, इसलिए केजरीवाल को इसके मुखिया होने के नाते यह घर मिला है। दिल्ली में पूर्व मुख्यमंत्रियों को बंगला मिलने का प्रावधान नहीं है, जिसके कारण सिविल लाइंस (फ्लैग स्टाफ रोड) वाला बंगला छोड़ने के बाद वे अपने सांसद के घर में रह रहे थे।
बता दें कि यह बंगला इतनी आसानी से नहीं मिला। आम आदमी पार्टी ने केजरीवाल को आवास न मिलने पर दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। पार्टी ने टाइप-8 बंगले की मांग की थी, लेकिन कोर्ट की फटकार के बाद केंद्र सरकार ने टाइप-7 बंगला आवंटित करने पर सहमति जताई। पिछले साल अक्टूबर में आवंटन की प्रक्रिया शुरू हुई थी, जो अब जाकर पूरी हुई है।
नए बंगले में प्रवेश करने के बाद अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से जनता के साथ यह जानकारी साझा की। उन्होंने अपनी पोस्ट में इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह आवास उन्हें किसी विशेष रियायत के तौर पर नहीं, बल्कि एक कानूनी प्रक्रिया के तहत प्राप्त हुआ है।
उन्होंने लिखा, 'पिछले दिनों केंद्र सरकार ने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक होने के नाते कोर्ट के आदेश पर मुझे घर आवंटित किया था। अपने परिवार के साथ मैं अब उस घर में शिफ्ट हो गया हूं।' केजरीवाल ने आगे यह भी संकेत दिया कि मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद से वे जिस अस्थायी आवास (सांसद अशोक मित्तल के घर) में रह रहे थे, वहां से अब वे अपने आधिकारिक तौर पर आवंटित नए पते '95, लोधी एस्टेट' पर पूरी तरह स्थापित हो चुके हैं। इस पोस्ट के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि लंबी कानूनी जद्दोजहद के बाद आखिरकार एक राष्ट्रीय पार्टी के मुखिया के तौर पर उनके अधिकार को मान्यता मिली है।
Updated on:
24 Apr 2026 03:13 pm
Published on:
24 Apr 2026 02:45 pm
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