
थ्राइव 2026 में साइंस एंड सिविलाइजेशन पैनल चर्चा के दौरान बिल ड्रेक्सल, दत्तात्रेय होसबाले, बेन ओल्सन और विलियम बी. हर्लबट।
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने विज्ञान, तकनीक और परंपरा के संतुलन पर जोर देते हुए कहा कि आधुनिक तकनीकी प्रगति को नैतिकता और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। वे अमरीका में कैलिफोर्निया के स्टैनफर्ड विश्वविद्यालय में एआई पर नीति संबंधि विचार विमर्श के शिखर सम्मेलन थ्राइव को संबोधित कर रहे थे। ग्लोबल साइंस इनोवेशन फोरम की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) और स्वास्थ्य मुख्य विषय रहे।
साइंस, नोलेज सिस्टम एवं सिविलाइजेशनल लीडरशिप विषय पर बोलते हुए होसबाले ने कहा कि वैज्ञानिक विकास का आकलन केवल आर्थिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और नैतिकत के समग्र परिप्रेक्ष्य में किया जाना चाहिए। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यदि इन्हें सही ढंग से समझा नहीं गया, तो अतीत के वैज्ञानिक ज्ञान को अंधविश्वास मानने की भूल हो सकती है। उनके अनुसार, भारत सहित विश्व की प्राचीन सभ्यताओं में निहित ज्ञान आधुनिक विज्ञान के साथ मिलकर मानवता के लिए अधिक संतुलित और स्थायी समाधान दे सकता है। उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग मानवता के हित में होना चाहिए, न कि केवल आर्थिक लाभ के लिए। इसके लिए ह्युमन एजेंसी यानी मानव नियंत्रण और निर्णय क्षमता को केंद्र में रखना जरूरी है। सम्मेलन में नोबेल पुरस्कार विजेताओं, वैश्विक नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया।
सम्मेलन में राम श्रीराम ने एआई आधारित शिक्षा को व्यक्तिगत और लोकतांत्रिक बताते हुए ज्ञान के व्यापक प्रसार की बात कही। नोबेल पुरस्कार से सम्मानित स्टीवन चू ने चेताया कि एआई रोजगार संरचना को बड़े पैमाने पर बदल सकता है, जिससे सामाजिक संतुलन चुनौती बन सकता है। वहीं विनोद खोसला ने सस्ती और टिकाऊ तकनीक के संयोजन पर जोर दिया। सम्मेलन में 20 से अधिक देशों के कॉन्सुल जनरल्स ने भाग लेकर तकनीकी नीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर अपने विचार साझा किए।
Updated on:
24 Apr 2026 12:50 pm
Published on:
24 Apr 2026 12:49 pm
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