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अजित पवार की मौत के बाद अब उनका बेटा करेगा कुछ बड़ा, शरद पवार की इस सीट से…

NCP Succession: अजित पवार अपने बेटे पार्थ पवार को राज्यसभा भेजने और प्रदेश अध्यक्ष बनाने की तैयारी में हैं। शरद पवार की खाली हो रही सीट पर पार्थ की एंट्री से महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आना तय माना जा रहा है।

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मुंबई

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MI Zahir

Feb 07, 2026

Parth Pawar Rajya Sabha

अजित पवार, पार्थ पवार और शरद पवार। ( प्रतीकात्मक फोटो: AI)

Political Speculation: महाराष्ट्र की राजनीति (Maharashtra Politics)में एक बार फिर बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP - अजित पवार गुट) में नेतृत्व परिवर्तन और भविष्य की रणनीतियों को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। खबरों की मानें तो उप मुख्यमंत्री अजित पवार (Ajit Pawar NCP) के बेटे पार्थ पवार (Parth Pawar News) राजनीति की मुख्यधारा में मजबूती से स्थापित करने के लिए बड़ा दांव खेलने की तैयारी में हैं। चर्चा यह है कि पार्थ पवार को न केवल पार्टी का प्रदेशाध्यक्ष बनाया जा सकता है, बल्कि उन्हें राज्यसभा (Sharad Pawar Rajya Sabha Seat) भेज कर संसद में भी एंट्री दिलाई जा सकती है।

शरद पवार की सीट पर नजर

राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा राज्यसभा सीट को लेकर है। दरअसल, एनसीपी के संस्थापक शरद पवार का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ऐसे में यह सीट खाली होने वाली है। सूत्रों के मुताबिक, अजित पवार गुट इस मौके का फायदा उठाते हुए पार्थ पवार को इस सीट से संसद भेजने की योजना बना रहा है। यदि ऐसा होता है, तो यह प्रतीकात्मक रूप से एक बड़ी घटना होगी, जहां चाचा (शरद पवार) की खाली हुई सीट पर भतीजे (अजित पवार) का बेटा काबिज होगा।

पार्टी की कमान सौंपने की तैयारी

सिर्फ राज्यसभा ही नहीं, बल्कि संगठन के स्तर पर भी पार्थ पवार का कद बढ़ाने की तैयारी चल रही है। अटकलें लगाई जा रही हैं कि उन्हें एनसीपी (अजित गुट) का नया प्रदेशाध्यक्ष नियुक्त किया जा सकता है। वर्तमान में यह जिम्मेदारी सुनील तटकरे के पास है। माना जा रहा है कि युवाओं को पार्टी से जोड़ने और भविष्य के नेतृत्व को तैयार करने के लिए अजित पवार यह कदम उठा सकते हैं। पार्थ को अध्यक्ष पद देकर अजित पवार पार्टी के भीतर अपनी पकड़ को और मजबूत करना चाहते हैं।

पुनर्वास करने की कोशिश

पार्थ पवार ने 2019 के लोकसभा चुनाव में मावल सीट से किस्मत आजमाई थी, लेकिन उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा था। उस हार के बाद से पार्थ सक्रिय राजनीति में थोड़े पीछे नजर आ रहे थे। अब 2024 और उसके बाद की राजनीति को देखते हुए, अजित पवार अपने बेटे का 'राजनीतिक पुनर्वास' करना चाहते हैं। राज्यसभा का सुरक्षित रास्ता और संगठन की बड़ी जिम्मेदारी, पार्थ के करियर को नई उड़ान देने के लिए सबसे मुफीद मानी जा रही है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू

एनसीपी (अजित गुट): पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं में इस खबर से उत्साह है। उनका कहना है कि पार्थ पवार के नेतृत्व में पार्टी को नई ऊर्जा मिलेगी और युवा वोटर आकर्षित होंगे।

एनसीपी (शरद पवार गुट): विपक्ष ने इसे 'परिवारवाद' का चरम बताया है। शरद पवार गुट के नेताओं का कहना है कि अजित पवार केवल अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित करने में लगे हैं, उन्हें जनता की चिंता नहीं है।

बीजेपी: गठबंधन की सहयोगी भाजपा ने फिलहाल इस पर नपी-तुली प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि यह एनसीपी का आंतरिक मामला है, लेकिन वे किसी भी निर्णय का स्वागत करेंगे जो गठबंधन (महायुति) को मजबूत करे।

बैठकों का दौर: आने वाले दिनों में एनसीपी (अजित गुट) की कोर कमेटी की बैठक होने वाली है, जिसमें इस प्रस्ताव पर आधिकारिक मुहर लग सकती है।

नामांकन की तारीख: राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू होते ही यह तथ्य साफ हो जाएगा कि पार्थ पवार का नाम फाइनल है या नहीं।

सुनील तटकरे की भूमिका: यदि पार्थ को प्रदेशाध्यक्ष बनाया जाता है, तो वर्तमान अध्यक्ष सुनील तटकरे को केंद्र में कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है या संगठन में कोई और पद दिया जाएगा, इस पर भी नजर बनी हुई है।

हार से लेकर 'पावर' तक का सफर

यह खबर इसलिए भी अहम है क्योंकि पार्थ पवार का पिछला चुनावी रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है।

हार का बदला: 2019 में मिली हार पार्थ के लिए एक बड़ा झटका थी। राज्यसभा के जरिये उन्हें बिना चुनाव लड़े संसद भेजने की तैयारी है, जो सुरक्षित राजनीति का संकेत है।

उत्तराधिकारी की खोज: अजित पवार की उम्र और राजनीतिक व्यस्तता को देखते हुए, वे जल्द से जल्द अपनी अगली पीढ़ी को स्थापित करना चाहते हैं, ताकि पार्टी पर उनके परिवार का नियंत्रण बना रहे।

युवा बनाम अनुभव: क्या पार्टी के वरिष्ठ नेता, जिन्होंने वर्षों पार्टी की सेवा की है, पार्थ जैसे अपेक्षाकृत अनुभवहीन नेता के नेतृत्व को स्वीकार करेंगे? यह एक बड़ा सवाल है, जो आने वाले समय में पार्टी के भीतर असंतोष का कारण भी बन सकता है।