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सिद्दारमैया के शपथ ग्रहण से पहले विपक्षी एकता में दरार, ममता बनर्जी ने समारोह से किया किनारा

Opposition Unity : बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 20 मई को आयोजित होने वाले सिद्दारमैया के शपथ ग्रहण समारोह के लिए न्योता दिया था, जिसमें उन्होंने जाने से किनारा कर लिया है। कांग्रेस इसके जरिए विपक्षी एकता दिखाने की कोशिश कर रही थी।

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Opposition Unity : कर्नाटक में सिद्धारमैया के शपथ ग्रहण समारोह से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और TMC की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने दूरी बना ली है। ममता बनर्जी कर्नाटक नहीं जाएंगी। बता दें कि कांग्रेस पार्टी कर्नाटक में अपनी बड़ी जीत के बाद सीएम के शपथ ग्रहण समारोह से विपक्षी एकता की बड़ी पिक्चर देश को दिखाना चाहती थी। लेकिन अब ममता के इस समारोह में शामिल नहीं होने से कांग्रेस के इस प्लान को बड़ा झटका लग गया है। बता दें कि, सिद्धारमैया के शपथ ग्रहण में बिहार के सीएम नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव साथ में बेंगलुरु जाएंगे। तेजस्वी यादव ने कहा कि कर्नाटक के बाद अब बीजेपी बिहार में डरी है। अब उसके बुरे दिन शुरू हो गए।


तृणमूल के नेता एवं राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ ब्रायन ने ट्वीट करके बताया- कर्नाटक के होने वाले मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और उनके अन्य साथियों ने तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष एवं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कल होने वाले शपथ ग्रहण समारोह के लिए व्यक्तिगत रूप से न्योता भेजा था। उन्होंने यानी (ममता बनर्जी) ने अपनी शुभकामनाएं दीं और लोकसभा में तृणमूल की उपनेता कोकिला घोष दस्तीदार से इस समारोह में शामिल होने को कहा।


कर्नाटक चुनाव नतीजों के बाद बदला था ममता का सुर

कर्नाटक में कांग्रेस की जीत के बाद ममता बनर्जी ने अपना मन बदला था। ममता ने कहा था कि वो कांग्रेस के समर्थन कर सकती हैं, लेकिन उनकी शर्त है की कांग्रेस भी उन जगहों पर अपना समर्थन दे, जहां दूसरी पार्टियां मज़बूत हैं। जिसके बाद कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने ममता के इस ऑफर को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का प्रभाव देश भर में दिख रहा है। हमारे नेता राहुल गाँधी की स्वीकार्यता पूरे देश में बढ़ रही है। आपको भी इस बात का भान है। इसीलिए आप ऐसे बात कर रही हो।

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बंगाल में कांग्रेस मुझसे लड़ना बंद करे

कुछ दिन पहले ममता ने कहा था- मैं तो शुरुआत से कह रही थी कि जिन राज्यों में क्षेत्रीय पार्टियां मजबूत है, वहां आप अपना पैर पसारना बंद करो, तभी हम आपके साथ आ पाएंगे। जैसे दिल्ली में आप, बिहार में राजद-जेडीयू, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और तमिलनाडु में द्रमुक-कांग्रेस और पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस।

हमने कर्नाटक में कांग्रेस का समर्थन किया था, अब उन्हें पश्चिम बंगाल में भी हमारा समर्थन करना चाहिए, तभी बीजेपी का मुकाबला हो पाएगा। यह बिलकुल सही नहीं है कि कर्नाटक में वे हमारे समर्थन का लाभ लेंगे और पश्चिम बंगाल में हमारा विरोध करेंगे। यह नहीं चलेगा।

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