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संदेशखाली के मुद्दे पर चुप्पी ममता को पड़ी भारी, 4 बार के विधायक बीजेपी में शामिल

West Bengal Politics: तृणमूल कांग्रेस के सीनियर नेता और 4 बार के विधायक तापस रॉय ने पहले टीएमसी ने अपना नाता तोड़ा और अब लोकसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी को तगड़ा झटका देते हुए बुधवार को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए।

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 Mamata silence on issue of Sandeshkhali cost her dearly 4 time MLA tapas roy joins BJP

संदेशखाली में हिंदू महिलाओं के यौन उत्पीड़न और सूबे में बढ़ते भ्रष्टाचार के मुद्दे पर ममता बनर्जी की चुप्पी अब उन्हें भारी पड़ने लगी है। तृणमूल कांग्रेस के सीनियर नेता और 4 बार के विधायक तापस रॉय ने पहले टीएमसी ने अपना नाता तोड़ा और अब लोकसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी को तगड़ा झटका देते हुए बुधवार को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। तापस रॉय सुवेंदु अधिकारी और बंगाल बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सकुांत मजूमदार की मौजूदगी में बीजेपी में शामिल हुए।

ममता की चुप्पी पड़ी भारी

हालांकि ये पहली बार नहीं है जह रॉय ने पाला बदला है। तृणमूल में आने से पहले रॉय कांग्रेस में थे। लेकिन जब ममता ने 1998 में अपनी अलग पार्टी बनाई तो वह ममता बनर्जी के साथ आ गए और करीब 25 साल तक मुख्यमंत्री के साथी बने रहे। बता दें कि रॉय ने पिछले दिनों इस्तीफा देने के बाद आरोप लगाया था कि जब उनके खिलाफ ईडी ने कार्रवाई की थी तो पार्टी ने साथ नहीं दिया था। वहीं, पार्टी में उचित सम्मान भी नहीं मिलने से नाराज थे।

विधायकी छोड़ कर बोले- मैं आजाद पंछी

तापस रॉय ने विधायक पद से इस्तीफा देते हुए तृणमूल कांग्रेस को छोड़ने का ऐलान किया था। तब रॉय ने विधानसभा अध्यक्ष इस्तीफा सौंपने के बाद कहा था कि मैं अब एक आजाद पंछी हूं। पार्टी के अंदर तापस रॉय की काफी दिनों से उत्तरी कोलकाता से टीएमसी सांसद सुदीप बंदोपाध्याय के साथ विवाद चल रहा था। ऐसी अटकलें हैं बीजेपी ने उन्हें उत्तरी कोलकाता को टिकट भी दे सकती है।

1996 में पहली बार चुने गए थे विधायक

तापस रॉय 1996 में विद्यासागर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए थे। रॉय ने 2001 का विधानसभा चुनाव बारा बाजार से टीएमसी के टिकट पर जीते थे। इसके बाद वह 2011 में उत्तर 24 परगना जिले के बारानगर विधानसभा क्षेत्र में चले गए। वे यहां से भी जीतने में सफल रहे थे। वह तब से इस सीट से टीएमसी विधायक थे। रॉय मौजूदा विधानसभा में टीएमसी के उप मुख्य सचेतक भी थे।

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