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BJP विधायक का चुनाव रद्द करने की याचिका खारिज, मणिपुर हाईकोर्ट ने कहा-टेक्नोलॉजी को इंजीनियरिंग लिखना फ्रॉड नहीं

Manipur High Court on Karam Shyam: मणिपुर हाईकोर्ट ने 2022 के लांगथाबल विधानसभा चुनाव में BJP उम्मीदवार करम श्याम की जीत को बरकरार रखते हुए कांग्रेस प्रत्याशी ओकरम जॉय सिंह की चुनाव याचिका खारिज कर दी।
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भारत

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Anand Shekhar

Jul 15, 2026

karan shayam manipur high court

मणिपुर हाई कोर्ट (फ़ोटो- https://hcmimphal.nic.in/)

Manipur High court decision: मणिपुर हाई कोर्ट ने कांग्रेस नेता ओकरम जॉय सिंह की याचिका को खारिज कर दिया और 2022 के लांगथाबल विधानसभा चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार करम श्याम की जीत को बरकरार रखा। 14 जुलाई को सुनाए गए फैसले में चीफ जस्टिस एम. मुरलीधरन ने कहा कि करम श्याम ने अपने चुनावी हलफनामे में जो गलत जानकारी दी थी, वह इतनी अहम नहीं थी कि उनकी उम्मीदवारी रद्द की जाए या चुनाव का नतीजा ही बदल दिया जाए। कोर्ट ने माना कि टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी की डिग्री को टेक्सटाइल इंजीनियरिंग बताना जरूरी जानकारी न देना या गुमराह करने वाली बात नहीं माना जा सकता।

याचिका में यह लगाए आरोप

कांग्रेस के ओक्राम जॉय सिंह ने मुख्य रूप से दो आधारों पर करम श्याम के चुनाव को चुनौती दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि श्याम ने गलत तरीके से दावा किया था कि उनके पास गवर्नमेंट सेंट्रल टेक्सटाइल इंस्टीट्यूट, कानपुर से टेक्सटाइल इंजीनियरिंग में बैचलर डिग्री है, जबकि 1987 में उन्हें जो डिग्री मिली थी, वह टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी में थी।

याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि श्याम ने फॉर्म 26 में गैर-कृषि भूमि वाले कॉलम में "NIL" (कुछ नहीं) लिखा था, जबकि उनके पास घर बनाने वाली जमीन (होमस्टेड लैंड) के दो जुड़े हुए हिस्से थे, जिनका साइज 0.132 एकड़ और 0.033 एकड़ था।

हालांकि, कोर्ट ने पाया कि करम श्याम ने आवासीय भवनों वाले कॉलम में जमीन और उस पर बने घर, दोनों की जानकारी दी थी। उसी प्रॉपर्टी का उल्लेख उनके आवासीय पते के तौर पर भी किया गया था। कोर्ट ने माना कि गैर-कृषि भूमि वाले कॉलम में जानकारी न दोहराने को संपत्ति छिपाने जैसा नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने माना अलग से नहीं मिलती डिग्री

करम श्याम की शैक्षणिक योग्यता के बारे में, कोर्ट ने माना कि टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी और टेक्सटाइल इंजीनियरिंग अलग-अलग कोर्स थे और उस संस्थान में 1987 में टेक्सटाइल इंजीनियरिंग में बैचलर डिग्री नहीं दी जाती थी। हालांकि, इस बात पर कोई विवाद नहीं था कि करम श्याम ने उस साल संस्थान से टेक्सटाइल इंडस्ट्री से जुड़ी चार साल की बैचलर डिग्री पूरी की थी।

कोर्ट ने कहा कि जानकारी में अंतर से वोटरों पर कोई खास असर नहीं पड़ा होगा और न ही चुनाव के नतीजे पर कोई फर्क पड़ा होगा। इसमें यह भी कहा गया कि टेक्नीशियन और इंजीनियर के बीच जमीन-आसमान का फर्क होने की दलील इस मामले के तथ्यों के सामने बेमानी हो गई।