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Manipur Violence: सरेआम गोलीबारी से केंद्रीय मंत्री का घर जलाने तक, 10 प्वाइंट में समझें मणिपुर हिंसा की पूरी कहानी

Manipur Violence : मणिपुर में कुकी और मेइती समुदाय के बीच हुए तनाव के बाद लगातार हिंसा का दौर जारी है। बीती रात ही केंद्रीय मंत्री आरके रंजन सिंह के घर पर आग लगा दी गई। आइए 10 प्वाइंट में समझते हैं मणिपुर हिंसा की पूरी कहानी।

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Manipur Violence : पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर (Manipur Violence) में लगातार हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। पहले सरेआम गोलीबरी और खूनी संघर्ष हुआ। अब बीते गुरुवार की रात को गुस्साए लोगों ने केंद्रीय मंत्री आरके रंजन सिंह (RK Ranjan Singh) के घर को आग लगा दी। अधिकारियों का कहना है कि हमले के समय पर केंद्रीय मंत्री घर पर मौजूद नहीं थे। दो समुदाय के अधिकारों को लेकर मचे इस बवाल में अब तक 100 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। तमाम सुरक्षा व्यवस्था और हजारों सुरक्षाबलों की तैनाती के बावजूद हिंसा पर काबू पाया नहीं जा सका है।



नेताओं के घरों को निशाना बना रहे उपद्रवी

बता दें कि मणिपुर के अलग-अलग इलाकों से आए दिन हिंसा की खबरें आ रही है। यह उपद्रवी अब नेताओं के घरों को निशाना बनाने से भी नहीं चूक रहे हैं। जातीय संघर्ष से प्रभावित राज्य में कम से कम दो खाली घरों में आग लगा दी गई। इस बात की जानकारी खुद अधिकारियों ने दी। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों ने इंफाल के न्यू चेकॉन में भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया और भीड़ पर आंसू गैस के गोले छोड़े। तो चलिए 10 प्वाइंट में समझते हैं कि मणिपुर हिंसा में अब तक क्या-क्या हुआ है।


1.
मणिपुर हिंसा में लेटेस्ट अपडेट है कि 15 जून, गुरुवार को इंफाल में कुछ लोगों ने गुस्से में आकर केंद्रीय मंत्री आरके रंजन सिंह के घर पर हमला बोल दिया। जिसके बाद घर को आग लगा दी गई। बताया जाता है कि केंद्रीय मंत्री घटना के समय अपने घर पर मौजूद नहीं थे। उपद्रवियों ने न्यू चेकऑन में दो और घरों में भी आग लगा दी।

2. इससे पहले उपद्रवियों ने इंफाल पश्चिम जिले के लाम्फेल इलाके में मणिपुर की महिला मंत्री नेमचा किपगेन के आधिकारिक आवास को आग के हवाले कर दिया था। हालांकि उस समय पुलिस की भारी तैनाती हो रखी थी। बावजूद घटना को अंजाम दिया गया।

3. जातीय संघर्ष से प्रभावित मणिपुर के खमेनलोक इलाके के एक गांव में 14 जून, बुधवार को संदिग्ध बदमाशों ने हमला कर दिया। इस हमले में नौ लोगों की मौत हो गई, जबकि 10 लोग घायल हो गए। इसके बाद कुकी समुदाय की नेता किपगेन के आवास में आग लगाई गई।

4. मणिपुर में लगातार हो रही हिंसा के बीच विपक्ष भी केंद्र सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मणिपुर में जारी हिंसा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि पूर्वोत्तर के लिए लुक ईस्ट की बात करने वाले पीएम की मणिपुर में जारी हिंसा पर खामोशी लोगों के घाव पर नमक रगड़ने जैसा है।

5. बता दें कि इस हिंसा को लेकर केंद्र सरकार की ओर से भी मणिपुर के राज्यपाल की अध्यक्षता में शांति समिति का गठन किया गया था। समिति के सदस्यों में मुख्यमंत्री, राज्य सरकार के कुछ मंत्री, सांसद, विधायक और तमाम राजनीतिक दलों के नेता शामिल हैं। इस कमेटी में रिटायर्ड ब्यूराक्रेट, शिक्षाविद्, साहित्यकार, कलाकार, सामाजिक कार्यकर्ता और जातीय समूहों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं।

6. इस भारी हिंसा को देखते हुए फिलहाल मणिपुर के 16 में से 11 जिलों में कर्फ्यू लगाया गया है। जबकि पूरे राज्य में इंटरनेट का उपयोग करने पर पाबंदी लगाई गई है। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है और उपद्रवियों से सख्ती के साथ निपटने के निर्देश दिए गए हैं।

7. एक महीने पहले मणिपुर में मेइती और कुकी समुदाय के लोगों के बीच हुई जातीय हिंसा में अब तक 100 से ज्यादा लोगों की जान चली गई है। जबकि 300 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा हजारों लोगों को जान बचाने के लिए विस्थापित होना पड़ा है।

8. मणिपुर में अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के विरोध में तीन मई को पर्वतीय जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' के आयोजन के बाद हिंसा शुरू हुई थी। इसके बाद से ही गोलीबारी और आगजनी की घटनाएं हर दूसरे दिन हो रही हैं।

9. दरअसल, मेइती समुदाय का आरोप है कि म्यांमार से जो लोग आए हैं वो आदिवासी समुदायों के साथ मिलकर आतंकवाद को फैला रहे हैं। वहीं आदिवासी संगठन का कहना है कि राज्य सरकार मेइती समुदाय के साथ मिलकर उन्हें प्रताड़ित कर रही हैं। मणिपुर हिंसा में दोनों पक्षों के सैकड़ों घरों को फूंक दिया गया है, जबकि कई निर्दोषों की निर्मम हत्या भी हुई है।

10. मणिपुर की 53 प्रतिशत आबादी मेइती समुदाय की है और ये मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहते हैं, जबकि नगा और कुकी जैसे आदिवासी समुदाय की आबादी करीब 40 प्रतिशत है और ये पर्वतीय जिलों में रहते हैं।

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