
मेटा इंडिया चीफ को 9 सितंबर को पेशी का आदेश दिया गया है। (फाइल फोटो - एएनआई)
Instagram Child Abuse Ads: इंस्टाग्राम पर बच्चों से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री वाले विज्ञापन दिखाए जाने के आरोपों को लेकर मेटा इंडिया पर जांच तेज हो गई है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने मेटा इंडिया के प्रबंध निदेशक और प्रमुख को 9 सितंबर को पेश होने के लिए तलब किया है। आयोग ने यह कार्रवाई बीबीसी आई की एक जांच रिपोर्ट के आधार पर शुरू की है।
बीबीसी आई की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि इंस्टाग्राम पर ऐसे विज्ञापन चल रहे थे जो बच्चों से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री तक पहुंच का रास्ता बता रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ विज्ञापनों में आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था और इन्हें टेलीग्राम के उन चैनलों से जोड़ा गया था जहां ऐसी सामग्री कथित तौर पर 99 रुपये तक में बेची जा रही थी। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि बीबीसी की तरफ से एक विज्ञापन की जानकारी इंस्टाग्राम को दी गई थी। इसके बाद प्लेटफॉर्म ने जवाब दिया कि उस विज्ञापन ने उसके नियमों का उल्लंघन नहीं किया है।
NCPCR ने बीबीसी आई की रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लेते हुए 3 जुलाई को मेटा प्लेटफॉर्म्स को नोटिस भेजा था। आयोग ने कंपनी से इन आरोपों पर जवाब मांगा था। मेटा ने करीब एक सप्ताह बाद अपना जवाब दाखिल किया। आयोग ने मेटा के जवाब की समीक्षा के बाद मामले में औपचारिक जांच शुरू करने का फैसला किया। अब इसी जांच के तहत मेटा इंडिया के प्रबंध निदेशक और प्रमुख को आयोग के सामने पेश होकर मामले से जुड़ी जानकारी देने के लिए कहा गया है।
इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) भी कार्रवाई कर चुका है। आयोग ने दिल्ली पुलिस को इंस्टाग्राम पर ऐसे विज्ञापनों के जरिए बच्चों से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री तक पहुंच के आरोपों की विस्तृत जांच करने को कहा है। NHRC ने यह भी जांचने को कहा है कि मेटा और दूसरी संबंधित संस्थाओं ने बच्चों के अपराधों से जुड़े मामलों की अनिवार्य सूचना देने की जिम्मेदारी का पालन किया या नहीं। आयोग ने दिल्ली पुलिस से मामले में कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी है।
इस मामले में केंद्र सरकार भी पहले मेटा से जवाब मांग चुकी है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने जुलाई में इंस्टाग्राम पर बच्चों से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री तक पहुंच बनाने वाले विज्ञापनों को हटाने का निर्देश दिया था। मंत्रालय ने यह भी पूछा था कि ऐसे विज्ञापन प्लेटफॉर्म पर मंजूर कैसे हुए और इन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए। मेटा ने तब कहा था कि बच्चों से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री के लिए उसकी शून्य सहनशीलता की नीति है। कंपनी ने कहा था कि वह ऐसी सामग्री की पहचान और उसे हटाने के लिए तकनीक और विशेषज्ञ टीमों का इस्तेमाल करती है।
Updated on:
08 Sept 2026 09:16 pm
Published on:
08 Sept 2026 09:16 pm
