
मानसून को लेकर आया अपडेट
Monsoon Update: देश में इस साल का दक्षिण-पश्चिम मानसून 'सामान्य से कमजोर' रहने की संभावना है। निजी एजेंसी स्काई मेट ने मानसून को लेकर पूर्वानुमान जारी किया है। स्काईमेट के अनुसार जून से सितंबर तक मानसून के लंबी अवधि के कुल औसत (एलपीए) की मात्र 94 प्रतिशत वर्षा होगी। देश में मानसून वर्षा का एलपीए 868.6 एमएम है। मानसून की कम वर्षा का प्रभाव देश की कृषि एवं खाद्यान्न उत्पादन पड़ सकता है।
एजेंसी के अनुसार प्रशांत महासागर में विकसित हो रहे अल नीनो मौसम पैटर्न के कारण मानसून के दूसरे हिस्से (जुलाई-अगस्त के बाद) में कम बारिश होने की आशंका है। अल नीनो की स्थिति में प्रशांत महासागर का जल तापमान सामान्य से अधिक रहता है, जो भारतीय मानसून को कमजोर करता है। वहीं ला नीना की स्थिति (जल तापमान कम) मानसून को मजबूत बनाती है।
स्काइमेट के संस्थापक जतिन सिंह सहित विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो का प्रभाव मुख्य रूप से मानसून के उत्तरार्ध में दिखेगा। हालांकि पूरे मौसम की सटीक पूर्वानुमान अभी चुनौतीपूर्ण है। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का पहला अधिकारिक पूर्वानुमान अभी तक जारी नहीं हुआ है। उम्मीद है कि आइएमडी का पूर्वानुमान अप्रैल के तृतीय सप्ताह में आ सकता है। आइएमडी के आधिकारिक पूर्वानुमान के बाद ही स्थिति और स्पष्ट होगी।
पश्चिमी-विक्षोभ के प्रभाव से मंगलवार को देश 25 राज्यों में कहीं हल्की तो कहीं तेज हवाओं के साथ मध्यम स्तर की वर्षा व ओलावृष्टि हुई। हिमाचल, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड पश्चिम बंगाल, ओडिशा, गुजरात समेत अन्य राज्यों के कई क्षेत्रों में तूफानी वर्षा और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि से जनजीवन बेहाल हो गया।
हिमाचल के चंबा में सिंयूर का निमार्णाधीन पुल ढह गया। कई जगहों पर फसलों व मंडियों में रखे अनाज को बड़ा नुकसान पहुंचा है। राजस्थान के कई जिले ओलावृष्टि व वर्षा से तरबतर हो गए। आइएमडी ने बुधवार के लिए 11 राज्यों हिमाचल, उत्तराखंड, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, सिक्किम व पश्चिम बंगाल में तेज आंधी-वर्षा व ओलावृष्टि को लेकर ऑरेंज अलर्ट और 15 राज्यों में येलो अलर्ट जारी किया गया है। आइएमडी के अनुसार 11 अप्रेल को पश्चिम हिमालय क्षेत्र में एक और नए विक्षोभ के आने की संभावना है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मानसून की वर्षा महत्वपूर्ण है। कृषि क्षेत्र देश की जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान देता है और 1.4 अरब से अधिक आबादी का आधे से ज्यादा हिस्सा इससे जुड़ा हुआ है। जून-सितंबर का दक्षिण-पश्चिम मानसून देश की कुल वार्षिक वर्षा का लगभग 70 प्रतिशत वर्षा लाता है। यह खरीफ फसलों की बुवाई के लिए जरूरी है, जो जून-जुलाई में होती है।
देश में दक्षिण पश्चिम मानसून सामान्यत 1 जून को केरल पहुंचता है और 15 जुलाई तक पूरे देश को कवर कर लेता है। यदि वर्षा कम हुई तो खरीफ फसलों जैसे धान, मक्का, सोयाबीन आदि पर असर पड़ सकता है, जिससे किसानों की आय प्रभावित हो सकती है और खाद्य सुरक्षा पर दबाव बढ़ सकता है। कमजोर मानसून की स्थिति में सरकार को जल संरक्षण, सिंचाई सुविधाओं और फसल बीमा जैसी योजनाओं पर अधिक ध्यान देना पड़ सकता है।
Published on:
08 Apr 2026 07:29 am
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