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दो हफ्ते का युद्धविराम: पाकिस्तान में होगी ईरान-अमेरिका वार्ता, मुआवजा और प्रतिबंध हटाने की मांग

ईरान और अमेरिका इस्लामाबाद में शांति वार्ता शुरू करने जा रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य, प्रतिबंध और सैन्य वापसी जैसे मुद्दे बातचीत के केंद्र में हैं। दो हफ्ते का युद्धविराम लागू है।

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भारत

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Ankit Sai

Apr 08, 2026

US President Donald Trump

ईरान और अमेरिका सीजफायर के लिए सहमत हो गए

Iran- US: मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर गहरा असर डाला है। अमेरिका और ईरान के बीच टकराव ने हाल के हफ्तों में युद्ध जैसे हालात पैदा कर दिए थे। अब दोनों देशों ने पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शुक्रवार से बातचीत शुरू करने पर सहमति जताई है, जो शांति की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

तेल मार्ग को लेकर बढ़ा विवाद

ईरान और अमेरिका के बीच सबसे बड़ा मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य का नियंत्रण है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है। हाल ही में ईरान द्वारा आंशिक नाकाबंदी के कारण तेल की कीमतों में तेजी आई और कई देशों में ईंधन संकट पैदा हुआ। अमेरिका ने इस जलमार्ग को पूरी तरह सुरक्षित और खुला रखने की शर्त रखी है, जबकि ईरान इसे अपने आर्थिक और रणनीतिक अधिकार के रूप में देखता है।

मुआवजा और प्रतिबंध हटाने की 10 मांगें

ईरान ने बातचीत के लिए जो 10 सूत्रीय प्रस्ताव रखा है, उसमें कई अहम मांगें शामिल हैं। इसमें मध्य पूर्व से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी, सभी आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना और युद्ध के दौरान हुए नुकसान का पूरा मुआवजा शामिल है। इसके अलावा ईरान ने अपने विदेशों में जमे हुए वित्तीय संपत्तियों को मुक्त करने और अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के तहत मान्यता देने की भी मांग की है। अमेरिका ने इस प्रस्ताव को बातचीत के लिए एक व्यवहारिक आधार बताया है और संकेत दिया है कि अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन सकती है।

10 सूत्रीय प्रस्ताव और शर्तें

  • होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का प्रभुत्व और निगरानी
  • मध्य पूर्व में स्थित ठिकानों से सभी “अमेरिकी लड़ाकू बलों की वापसी
  • सहयोगी सशस्त्र समूहों के खिलाफ सैन्य अभियानों को रोकना
  • युद्ध में हुए नुकसान के लिए पूर्ण मुआवजे की मांग
  • सभी प्रतिबंधों को हटाना अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी द्वारा लगाए गए
  • विदेशों में जमी ईरानी संपत्तियों को जारी करना
  • अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बाध्यकारी प्रस्ताव के रूप में अनुमोदित करना
  • लेबनान और गाजा में भी युद्ध की समाप्ति
  • लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ लड़ाई समेत सभी मोर्चों पर युद्ध विराम।
  • अहिंसा के प्रति प्रतिबद्धता भविष्य में ईरान पर आक्रमण नहीं करने की मजबूत अंतरराष्ट्रीय गारंटी मिले।

दो हफ्ते का युद्धविराम, तनाव बरकरार

दोनों देशों के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम लागू किया गया है, जिसे तत्काल प्रभाव से लागू माना जा रहा है। इस दौरान सभी सैन्य गतिविधियां रोकने पर सहमति बनी है। इस संघर्ष का असर केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लेबनान और यमन जैसे देशों में भी इसके प्रभाव देखे गए। हिजबुल्लाह और हूती समूहों की भागीदारी ने तनाव को और बढ़ा दिया था। पाकिस्तान ने इस वार्ता की मेजबानी करते हुए दोनों पक्षों को एक मंच पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।