
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Photo- IANS)
Iran- US: मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर गहरा असर डाला है। अमेरिका और ईरान के बीच टकराव ने हाल के हफ्तों में युद्ध जैसे हालात पैदा कर दिए थे। अब दोनों देशों ने पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शुक्रवार से बातचीत शुरू करने पर सहमति जताई है, जो शांति की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
ईरान और अमेरिका के बीच सबसे बड़ा मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य का नियंत्रण है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है। हाल ही में ईरान द्वारा आंशिक नाकाबंदी के कारण तेल की कीमतों में तेजी आई और कई देशों में ईंधन संकट पैदा हुआ। अमेरिका ने इस जलमार्ग को पूरी तरह सुरक्षित और खुला रखने की शर्त रखी है, जबकि ईरान इसे अपने आर्थिक और रणनीतिक अधिकार के रूप में देखता है।
ईरान ने बातचीत के लिए जो 10 सूत्रीय प्रस्ताव रखा है, उसमें कई अहम मांगें शामिल हैं। इसमें मध्य पूर्व से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी, सभी आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना और युद्ध के दौरान हुए नुकसान का पूरा मुआवजा शामिल है। इसके अलावा ईरान ने अपने विदेशों में जमे हुए वित्तीय संपत्तियों को मुक्त करने और अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के तहत मान्यता देने की भी मांग की है। अमेरिका ने इस प्रस्ताव को बातचीत के लिए एक व्यवहारिक आधार बताया है और संकेत दिया है कि अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन सकती है।
दोनों देशों के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम लागू किया गया है, जिसे तत्काल प्रभाव से लागू माना जा रहा है। इस दौरान सभी सैन्य गतिविधियां रोकने पर सहमति बनी है। इस संघर्ष का असर केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लेबनान और यमन जैसे देशों में भी इसके प्रभाव देखे गए। हिजबुल्लाह और हूती समूहों की भागीदारी ने तनाव को और बढ़ा दिया था। पाकिस्तान ने इस वार्ता की मेजबानी करते हुए दोनों पक्षों को एक मंच पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
Updated on:
08 Apr 2026 08:47 am
Published on:
08 Apr 2026 08:47 am
