
होली
दिल्ली में मजमा लगा, धरना कपड़ा-लेस। पकड़े नेता पुलिस ने, चिढ़ी युवा कंगरेस।।
चिढ़ी युवा कंगरेस, गजब मोदी ललकारे। बोले है अपमान, देश का जग में सारे।।
राहुल कूदे आय, कहैं यूं उड़ी ये खिल्ली। आरोपों के रंग, सियासी 'हो ली दिल्ली'।।
उफनाया था शौक तब, करजा लियो करोड़। राजपाल के भाग में, आयो गड़बड़ मोड़।।
आयो गड़बड़ मोड़, दौड़ लागी तिहाड़ तक। बनते थे बलवान, ऊंट आयो पहाड़ तक।।
कुछ ही भये सहाय, बहुत ने बस ठुकराया। को कर सकत उपाय, करम का घट उफनाया।।
गाथा संतों की सुनो, ध्यान लगा अनिवार्य।
इत योगी सरकार है, उत शंकर आचार्य।।
उत शंकर आचार्य, दोऊ बढ़-चढक़र अखड़।
देखत सकल समाज, लड़त दो साधू फकड़।।
'शंकर' 'नाथ' भिड़ंत, भगत पकड़े हैं माथा।
दिखै आदि ना अंत, बढ़ी गफलत की गाथा।।
रोवत जेब गरीब की,
महंगाई का कूप।
सोना राजा सा बना,
चांदी रानी रूप।।
चांदी रानी रूप,
दाम में लागी आगी।
कैसे होय विवाह,
मात पित टेंशन जागी।।
जाके हाथ न कैश,
रात ना दिन में सोवत।
गोल्डवान हैरान,
स्वर्ण बिन कइयक रोवत।।
मोहन जन का ध्यान
धर, दियो पिटारा खोल।
बजट रपट को देखकर,
कमलनाथ झट बोल।।
कमलनाथ झट बोल,
बताशा है बातों का।
ना है खास हिसाब,
खरच आमद खातों का।
उधर भाजपा राग,
कहत खुश हैं सब लोगन।
नारी यूथ किसान,
रखा मन सबका मोहन।।
नखरे लाखों थे बड़े,
बढ़ी हुई थी मूंछ।
लहजा टेढ़ा ही रहा,
ज्यों श्वानों की पूंछ।।
ज्यों श्वानों की पूंछ,
'शाह' ने सीधी कर दी।
पाकिस्तान निराश,
चाल जो उलटी चल दी।।
इज्जत बची न मैच,
फिरत मारे अध-कचरे।
मौका कियो न कैच,
करे बेमतलब नखरे।।
तेजी से रंग बदलते इस दौर में कहीं डॉनल्ड ट्रंप का ‘आइलैंड राग’ और टैरिफ की ठसक, तो
कहीं नरेन्द्र मोदी-राहुल गांधी की रंगभरी ‘अनकॉ्प्रोमाइज्ड’ टकर… खेल का मैदान हो या
कारोबार का चौक, हर गहमागहमी पर फागुनी छाप… चित्र-शिल्पी शिरीष श्रीवास्तव की
कूंची और फागुनी कलमकार राम नरेश गौतम की रंगरेज लेखनी ने होली के रंगों में मुस्कान
की ऐसी मिठास घोली है जो आपको भिगोएगी भी और गुदगुदाएगी भी…
Updated on:
03 Mar 2026 01:39 pm
Published on:
03 Mar 2026 12:07 pm
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